25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ मंदिर में पूजा करने के बाद विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी जिस 'राम रथ' को लेकर देश भर की यात्रा पर निकले थे, उस पर काली दाढ़ी वाले एक व्यक्ति भी सवार नज़र आते थे.
आडवाणी के रथ पर सवार वही स्वयंसेवक करीब 24 साल के सियासी सफ़र के बाद 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने.
नरेंद्र मोदी तब आडवाणी के रथ पर सवार थे, लेकिन अब वे सत्ता के शीर्ष पर हैं, इसलिए रथ पर सवारी की ज़िम्मेदारी अभिभावक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने संतों-महंतों को सौंप दी है.
वैसे भी अयोध्या का आंदोलन विश्व हिंदू परिषद चलाती रही है. सिर्फ़ अगस्त 1990 से 6 दिसंबर 1992 तक आडवाणी ने इसकी कमान संभाली थी.
सितंबर 1990 में आडवाणी की रथ यात्रा शुरू होने से एक महीने पहले देश में एक और बड़ी घटना हुई थी, अगस्त महीने में तब के प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने अन्य पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने की मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने का ऐलान किया था. दस साल धूल खा रही बीपी मंडल की रिपोर्ट ने राजनीति में भूचाल ला दिया.
वीपी सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार दो बैसाखियों पर टिकी थी, एक ओर वामपंथी और दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी, दोनों उनकी सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे.
मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू करने की वीपी सिंह की घोषणा ने बीजेपी को सकते में डाल दिया, लेकिन बीजेपी ने राजीव गांधी की तरह तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी.
बीजेपी के नेता देश की राजनीति में जाति की पेचीदगियों को समझते हैं, और तब भी समझते थे. राजीव गांधी ने तो वीपी सिंह की तुलना जिन्ना से करते हुए, मंडल आयोग की सिफ़ारिशों का ज़ोरदार विरोध किया.
लेकिन मंडल आयोग की सिफ़ारिशों के दूरगामी राजनीतिक असर की काट के लिए बीजेपी ने 'हिंदू एकता' का नारा देते हुए राम मंदिर का आंदोलन तेज़ कर दिया.
1990 के अंतिम चार महीनों में मंडल विरोध और मंदिर आंदोलन से पूरे देश का राजनीतिक माहौल गरम गया.
पांच हफ़्ते तक 'बाबर की औलादों' को धमकाते हुए, हर दिन अलग-अलग जगहों पर छह जनसभाएं करते हुए, तनावपूर्ण सांप्रदायिक माहौल में जब आडवाणी का रथ बिहार पहुंचा, तो सिर्फ़ 8 महीने पहले मुख्यमंत्री बने लालू यादव ने उन्हें सिंचाई विभाग के मसानजोर गेस्ट हाउस में बंद करा दिया.
जनता दल के नेता लालू यादव की इस कार्रवाई का असर ये हुआ कि बीजेपी ने वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया, बहुमत खोने के बाद नवंबर 1990 में उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा.
नौ नवंबर 1990 को वीपी सिंह ने कहा कि वे सामाजिक न्याय के पक्ष में, और सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ लड़ाई में अपनी गद्दी कुर्बान कर रहे हैं.
मार्के की बात ये है कि बीजेपी ने मंडल आयोग की सिफ़ारिशों के विरोध में वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस लेने की बात तो दूर, कभी उसका खुलकर विरोध भी नहीं किया, बल्कि हमेशा ही जातियों में बंटे समुदायों को हिंदू धर्म के नाम पर जोड़ने की राजनीति की, जो मुसलमानों की बात किए बिना पूरी नहीं हो पाती.
इसी टकराव को मीडिया ने मंडल बनाम कमंडल का नाम दिया, कई सालों तक सतह के नीचे दबे रहने के बाद यह टकराव एक बार फिर उभरता दिख रहा है जो 2019 के चुनाव में ज़ोरदार ढंग से सामने आ सकता है.
इन दो धाराओं का टकराव ज़रूर होगा, भले मोदी अभी राम मंदिर के मुद्दे पर आक्रामक नहीं हैं लेकिन आगे-आगे देखिए होता है क्या. मंदिर के मामले को गरमाने का काम अभी संघ के दूसरे सिपाही कर रहे हैं.
मोदी अभी दूसरी 'दवाइयों' का असर परखेंगे उसके बाद ज़रूरत के हिसाब से अयोध्या अस्त्र का इस्तेमाल करेंगे.
वैसे इस चुनाव में नरेंद्र मोदी खुद अयोध्या से कम बड़ा मुद्दा नहीं हैं.
हिंदुत्व बनाम सामाजिक न्याय के टकराव के समानांतर, एक और टकराव साफ़ देखने को मिलेगा. वह होगा मोदी बचाओ बनाम मोदी हटाओ.
Monday, December 31, 2018
Wednesday, December 26, 2018
48MP कैमरा और Punch Hole डिस्प्ले के साथ Honor V20 लॉन्च
चीनी कंपनी हुआवे की सबसिडरी Honor ने V20 लॉन्च कर दिया है. इस स्मार्टफोन की डिस्प्ले में होल दिया गया है. कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का पहला स्मार्टफोन है जिसकी डिस्प्ले में होल दिया गया है. दरअसल इस होल में कंपनी ने फ्रंट कैमरा दिया है, ताकि फुल डिस्प्ले दी जा सके.
इस स्मार्टफोन की दूसरी खासियत इसमें दिया गया 48 मेगापिक्सल का कैमरा. इस स्मार्टफोन को कंपनी ने हाल ही में शोकेस किया था. अब इसकी कीमतें भी सामने आ गई हैं. Honor V20 के बेस वेरिएंट कीमत 2999 युआन (लगभग 30,000 रुपये) है. जबकि दूसरे वेरिएंट में की कीमत 3499 युआन (लगभग 35,500 रुपये) है. इस स्मार्टफोन का स्पेशल Moschino एडिशन भी लॉन्च हुआ है जिसमें 8GB रैम के साथ 256GB इंटरनल मेमोरी दी गई है. इसकी कीमत 3999 युआन (लगभग 40,000 रुपये) है.
इस स्मार्टफोन की ग्लोबल लॉन्चिंग 22 जनवरी को पेरिस में होगी और इसे ग्लोबल Honor View 20 नाम से लॉन्च किया जाएगा. भारत में भी इसी वक्त इसे पेश किया जा सकता है, लेकिन कंपनी ने इसे कन्फर्म नहीं किया है.
स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो इसमें 6.4 इंच की फुल एचडी डिस्प्ले दी गई है और इसमें Kirin 980 प्रोसेसर दिया गया है. इस स्मार्टफोन में 8GB रैम दिया गया है. इस स्मार्टफोन में पंच होल डिस्प्ले है यानी स्क्रीन के टॉप लेफ्ट में छोटा कटआउट है जिसमे कैमरा है. फ्रंट कैमरा 25 मेगापिक्सल का है. इस फोन में रियर फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है.
फोटॉग्रफी के लिए इसमें 48 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा है. कंपनी ने इसमें SONY IMX 586 सेंसर यूज किया है जिसके तहत पिक्सल बाइनिंग टेक्नॉलजी से चार 0.8 माइक्रॉन पिक्सल को मिला कर लार्ज 1.6 माइक्रॉन पिक्सल दिया जाएगा. इसमें दिए गए चिपसेट की वजहे से 48 मेगापिक्सल AI HDR मोड मिलेगा जिससे हाई डेफिनिशन इमेज क्रिएट होंगी.
इस स्मार्टफोन में 4,000mAh की बैटरी दी गई है और कंपनी के मुताबिक ये स्मार्टफोन सुपर फास्ट चार्ज टेक्नॉलजी सपोर्ट करती है. इसमें Android Pie बेस्ड Magic UI 2.0 दिया गया है. हालांकि इसके ग्लोबल वर्जन में EMUI 9.0 दिया जाएगा.
कंपनी ने इसके साथ लिंक टर्बो फीचर दिया है. इसके जरिए बेहतर नेटवर्क स्पीड को देखते हुआ आपका स्मार्टफोन वाईफाई से LTE और LTE से वाईफाई में कनेक्ट होगा. ये फीचर स्मार्टफोन में दिए AI के तहत काम करता है और यूजर बिहेवियर को समझते हुए नेटवर्क चेंज करता है. यानी अगर मोबाइल इंटरनेट फास्ट है और वाईफाई स्लो तो ऐसे में ये स्विच करके LTE मे चला जाएगा. ये कंपनी का दावा है.
इस स्मार्टफोन की दूसरी खासियत इसमें दिया गया 48 मेगापिक्सल का कैमरा. इस स्मार्टफोन को कंपनी ने हाल ही में शोकेस किया था. अब इसकी कीमतें भी सामने आ गई हैं. Honor V20 के बेस वेरिएंट कीमत 2999 युआन (लगभग 30,000 रुपये) है. जबकि दूसरे वेरिएंट में की कीमत 3499 युआन (लगभग 35,500 रुपये) है. इस स्मार्टफोन का स्पेशल Moschino एडिशन भी लॉन्च हुआ है जिसमें 8GB रैम के साथ 256GB इंटरनल मेमोरी दी गई है. इसकी कीमत 3999 युआन (लगभग 40,000 रुपये) है.
इस स्मार्टफोन की ग्लोबल लॉन्चिंग 22 जनवरी को पेरिस में होगी और इसे ग्लोबल Honor View 20 नाम से लॉन्च किया जाएगा. भारत में भी इसी वक्त इसे पेश किया जा सकता है, लेकिन कंपनी ने इसे कन्फर्म नहीं किया है.
स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो इसमें 6.4 इंच की फुल एचडी डिस्प्ले दी गई है और इसमें Kirin 980 प्रोसेसर दिया गया है. इस स्मार्टफोन में 8GB रैम दिया गया है. इस स्मार्टफोन में पंच होल डिस्प्ले है यानी स्क्रीन के टॉप लेफ्ट में छोटा कटआउट है जिसमे कैमरा है. फ्रंट कैमरा 25 मेगापिक्सल का है. इस फोन में रियर फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है.
फोटॉग्रफी के लिए इसमें 48 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा है. कंपनी ने इसमें SONY IMX 586 सेंसर यूज किया है जिसके तहत पिक्सल बाइनिंग टेक्नॉलजी से चार 0.8 माइक्रॉन पिक्सल को मिला कर लार्ज 1.6 माइक्रॉन पिक्सल दिया जाएगा. इसमें दिए गए चिपसेट की वजहे से 48 मेगापिक्सल AI HDR मोड मिलेगा जिससे हाई डेफिनिशन इमेज क्रिएट होंगी.
इस स्मार्टफोन में 4,000mAh की बैटरी दी गई है और कंपनी के मुताबिक ये स्मार्टफोन सुपर फास्ट चार्ज टेक्नॉलजी सपोर्ट करती है. इसमें Android Pie बेस्ड Magic UI 2.0 दिया गया है. हालांकि इसके ग्लोबल वर्जन में EMUI 9.0 दिया जाएगा.
कंपनी ने इसके साथ लिंक टर्बो फीचर दिया है. इसके जरिए बेहतर नेटवर्क स्पीड को देखते हुआ आपका स्मार्टफोन वाईफाई से LTE और LTE से वाईफाई में कनेक्ट होगा. ये फीचर स्मार्टफोन में दिए AI के तहत काम करता है और यूजर बिहेवियर को समझते हुए नेटवर्क चेंज करता है. यानी अगर मोबाइल इंटरनेट फास्ट है और वाईफाई स्लो तो ऐसे में ये स्विच करके LTE मे चला जाएगा. ये कंपनी का दावा है.
Sunday, December 16, 2018
श्रीलंका में प्रधानमंत्री पद पर फिर लौटे रानिल विक्रमसिंघे
श्रीलंका में जारी राजनीतिक उठापटक में अब रानिल विक्रमसिंघे ने फिर से प्रधानमंत्री पद पर वापसी की है.
अक्तूबर में प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद रविवार को उन्होंने फिर से पद की शपथ ली.
विक्रमसिंघे के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद इस द्वीपीय देश में जारी राजनीतिक संकट के भी समाप्त होने के संकेत मिले हैं.
राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने रानिल विक्रमसिंघे को फिर से प्रधानमंत्री न बनाने का प्रण लिया था. लेकिन अचानक बदले घटनाक्रम में रविवार को विक्रमसिंगे फिर से प्रधानमंत्री बना दिए गए.
सेना को अस्थायी बजट लागू करने के लिए एक जनवरी से पहले संसद की मंज़ूरी लेना आवश्यक था और इसी वजह से उन्हें अपना रुख बदलना पड़ा है.
पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने सरकार के ठप्प होने की आंशकाओं के मद्देनज़र शनिवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. राजपक्षे संसद में बहुमत साबित नहीं कर सके थे.
ये पांचवीं बार है जब विक्रमसिंघे ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है लेकिन इससे पहले वो एक भी बार कार्यकाल पूरा नहीं कर सके हैं.
रविवार को हुए शपथ समारोह में मीडिया को नहीं बुलाया गया था और इसमें विक्रमसिंघे के गठबंधन के कुछ ही नेता शामिल थे.
अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में राष्ट्रपति मैत्रीपाल श्रीसेना ने मतभेदों की वजह से अपने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पद से हटा दिया था.
इसके बाद उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी और पूर्व राष्ट्रपति रहे महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी लेकिन राजपक्षे संसद में बहुमत साबित नहीं कर सके.
राष्ट्रपति कार्यालय और संसद के बीच गतिरोध की वजह से श्रीलंका में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था.
वहीं एक निचली अदालत ने राजपक्षे और उनकी मंत्रिपरिषद के काम करने पर रोक लगा दी थी. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.
अक्तूबर में प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद रविवार को उन्होंने फिर से पद की शपथ ली.
विक्रमसिंघे के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद इस द्वीपीय देश में जारी राजनीतिक संकट के भी समाप्त होने के संकेत मिले हैं.
राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने रानिल विक्रमसिंघे को फिर से प्रधानमंत्री न बनाने का प्रण लिया था. लेकिन अचानक बदले घटनाक्रम में रविवार को विक्रमसिंगे फिर से प्रधानमंत्री बना दिए गए.
सेना को अस्थायी बजट लागू करने के लिए एक जनवरी से पहले संसद की मंज़ूरी लेना आवश्यक था और इसी वजह से उन्हें अपना रुख बदलना पड़ा है.
पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने सरकार के ठप्प होने की आंशकाओं के मद्देनज़र शनिवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. राजपक्षे संसद में बहुमत साबित नहीं कर सके थे.
ये पांचवीं बार है जब विक्रमसिंघे ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है लेकिन इससे पहले वो एक भी बार कार्यकाल पूरा नहीं कर सके हैं.
रविवार को हुए शपथ समारोह में मीडिया को नहीं बुलाया गया था और इसमें विक्रमसिंघे के गठबंधन के कुछ ही नेता शामिल थे.
अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में राष्ट्रपति मैत्रीपाल श्रीसेना ने मतभेदों की वजह से अपने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पद से हटा दिया था.
इसके बाद उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी और पूर्व राष्ट्रपति रहे महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी लेकिन राजपक्षे संसद में बहुमत साबित नहीं कर सके.
राष्ट्रपति कार्यालय और संसद के बीच गतिरोध की वजह से श्रीलंका में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था.
वहीं एक निचली अदालत ने राजपक्षे और उनकी मंत्रिपरिषद के काम करने पर रोक लगा दी थी. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.
Monday, December 10, 2018
कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम होंगे देश के नए मुख्य आर्थिक सलाहकार, 3 साल का होगा कार्यकाल
हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम को देश का नया मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया है. उनका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा. सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.
बता दें कि अरविंद सुब्रमण्यम ने इस साल जुलाई में व्यक्तिगत कारणों से मुख्य आर्थिक सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था. अरविंद सुब्रमण्यम ने अक्टूबर, 2014 में मुख्य आर्थिक सलाहकार का पद संभाला था. उन्होंने रघुराम राजन की जगह ली थी. इस दौरान रघुराम राजन आरबीआई गवर्नर बने थे. अरविंद सुब्रमण्यम ने का कार्यकाल मई 2019 तक था.
सुब्रमण्यम शिकागो बूथ से पीएचडी हैं और आईआईटी और आईआईएम के छात्र भी रह चुके हैं. सुब्रमण्यम की गिनती दुनिया के टॉप बैंकिंग, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और इकनॉमिक पॉलिसी एक्सपर्ट में होती है. एकेडमिक करियर की शुरुआत से पहले सुब्रमण्यम न्यूयॉर्क में जेपी मॉर्गन चेज के साथ कंसल्टेंट के तौर पर काम कर चुके हैं.
वहीं मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतगणना की वेबकास्टिंग न करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह निर्देश जारी किए गए हैं कि काउंटिग हॉल में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और मतगणना के दौरान वाईफाई का इस्तेमाल न हो.
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.
इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.
बता दें कि अरविंद सुब्रमण्यम ने इस साल जुलाई में व्यक्तिगत कारणों से मुख्य आर्थिक सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था. अरविंद सुब्रमण्यम ने अक्टूबर, 2014 में मुख्य आर्थिक सलाहकार का पद संभाला था. उन्होंने रघुराम राजन की जगह ली थी. इस दौरान रघुराम राजन आरबीआई गवर्नर बने थे. अरविंद सुब्रमण्यम ने का कार्यकाल मई 2019 तक था.
सुब्रमण्यम शिकागो बूथ से पीएचडी हैं और आईआईटी और आईआईएम के छात्र भी रह चुके हैं. सुब्रमण्यम की गिनती दुनिया के टॉप बैंकिंग, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और इकनॉमिक पॉलिसी एक्सपर्ट में होती है. एकेडमिक करियर की शुरुआत से पहले सुब्रमण्यम न्यूयॉर्क में जेपी मॉर्गन चेज के साथ कंसल्टेंट के तौर पर काम कर चुके हैं.
वहीं मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतगणना की वेबकास्टिंग न करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह निर्देश जारी किए गए हैं कि काउंटिग हॉल में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और मतगणना के दौरान वाईफाई का इस्तेमाल न हो.
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.
इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.
Tuesday, December 4, 2018
एक और 'पप्पू' जो 18 वर्षों से कर रहा है ओडिशा पर राज
भारतीय राजनीति में सिर्फ़ सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग अकेले राजनेता हैं जो नवीन पटनायक से अधिक समय तक इस पद पर बने रहे हैं.
नवीन के बारे में मशहूर है कि वो शायद भारत के सबसे चुप रहने वाले राजनेता हैं जिन्हें शायद ही किसी ने आवाज़ ऊंची कर बात करते सुना है.
हाल ही में नवीन पटनायक की जीवनी लिखने वाले अंग्रेज़ी पत्रिका आउटलुक के संपादक रूबेन बैनर्जी बताते हैं, "आप उनसे मिलेंगे तो पाएंगे कि उनसे बड़ा सॉफ़्ट स्पोकेन, शिष्ट, सभ्रांत और कम बोलने वाला शख़्स है ही नहीं. कभी कभी तो लगता है कि वो राजनेता हैं ही नहीं. लेकिन सच ये है कि उनसे बड़े राजनीतिज्ञ बहुत कम लोग हैं."
"वो न सिर्फ़ राजनीतिज्ञ हैं बल्कि निर्मम राजनीतिज्ञ हैं. इस हद तक कि पहुंचे हुए राजनीतिज्ञ भी उनका मुक़ाबला नहीं कर सकते. कुछ लोग कहते हैं कि राजनीति उनकी रगों में है. लेकिन ये भी सच है कि अपने जीवन के शुरुआती 50 सालों में उन्होंने राजनीति की तरफ़ रुख़ नहीं किया. लेकिन एक बात पर किसी का मतभेद नहीं हो सकता कि नवीन बहुत चालाक हैं. ओडिशा में उनकी टक्कर का राजनेता दिखाई नहीं देता."
नवीन पटनायक को राजनीति विरासत में मिली थी. उनके पिता बीजू पटनायक न सिर्फ़ ओडिशा के मुख्यमंत्री थे बल्कि जाने माने स्वतंत्रता सेनानी और पायलट थे.
बीजू पटनायक का योगदान
बीजू पटनायक के जीवनीकार सुंदर गणेशन अपनी किताब 'द टॉल मैन' में लिखते हैं, "बीजू पटनायक ने दिल्ली की सफ़दरजंग हवाई पट्टी से श्रीनगर के लिए अपने डकोटा डी सी-3 विमान से कई उड़ाने भरी थीं. 17 अक्तूबर 1947 को वो लेफ़्टिनेंट कर्नल देवान रंजीत राय के नेतृत्व में 1-सिख रेजिमेंट के 17 जवानों को लेकर श्रीनगर पहुंचे थे."
"उन्होंने ये देखने के लिए कि हवाई पट्टी पर पाकिस्तानी सैनिकों का क़ब्ज़ा तो नहीं हो गया था, दो बार बहुत नीचे उड़ान भरी. प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की तरफ़ से उन्हें साफ़ निर्देश थे कि अगर उन्हें ये लगे कि हवाई पट्टी पर पाकिस्तान का नियंत्रण हो गया है तो वो वहाँ पर अपना विमान न उतारें."
"बीजू पटनायक ने विमान को ज़मीन से कुछ ही मीटर ऊपर उड़ाते हुए देखा कि विमान पट्टी पर एक भी शख़्स मौजूद नहीं था. उन्होंने अपने विमान को नीचे उतारा और वहाँ पहुंचे 17 भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी हमलावरों को खदेड़ने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई."
नवीन के बारे में मशहूर है कि वो शायद भारत के सबसे चुप रहने वाले राजनेता हैं जिन्हें शायद ही किसी ने आवाज़ ऊंची कर बात करते सुना है.
हाल ही में नवीन पटनायक की जीवनी लिखने वाले अंग्रेज़ी पत्रिका आउटलुक के संपादक रूबेन बैनर्जी बताते हैं, "आप उनसे मिलेंगे तो पाएंगे कि उनसे बड़ा सॉफ़्ट स्पोकेन, शिष्ट, सभ्रांत और कम बोलने वाला शख़्स है ही नहीं. कभी कभी तो लगता है कि वो राजनेता हैं ही नहीं. लेकिन सच ये है कि उनसे बड़े राजनीतिज्ञ बहुत कम लोग हैं."
"वो न सिर्फ़ राजनीतिज्ञ हैं बल्कि निर्मम राजनीतिज्ञ हैं. इस हद तक कि पहुंचे हुए राजनीतिज्ञ भी उनका मुक़ाबला नहीं कर सकते. कुछ लोग कहते हैं कि राजनीति उनकी रगों में है. लेकिन ये भी सच है कि अपने जीवन के शुरुआती 50 सालों में उन्होंने राजनीति की तरफ़ रुख़ नहीं किया. लेकिन एक बात पर किसी का मतभेद नहीं हो सकता कि नवीन बहुत चालाक हैं. ओडिशा में उनकी टक्कर का राजनेता दिखाई नहीं देता."
नवीन पटनायक को राजनीति विरासत में मिली थी. उनके पिता बीजू पटनायक न सिर्फ़ ओडिशा के मुख्यमंत्री थे बल्कि जाने माने स्वतंत्रता सेनानी और पायलट थे.
बीजू पटनायक का योगदान
बीजू पटनायक के जीवनीकार सुंदर गणेशन अपनी किताब 'द टॉल मैन' में लिखते हैं, "बीजू पटनायक ने दिल्ली की सफ़दरजंग हवाई पट्टी से श्रीनगर के लिए अपने डकोटा डी सी-3 विमान से कई उड़ाने भरी थीं. 17 अक्तूबर 1947 को वो लेफ़्टिनेंट कर्नल देवान रंजीत राय के नेतृत्व में 1-सिख रेजिमेंट के 17 जवानों को लेकर श्रीनगर पहुंचे थे."
"उन्होंने ये देखने के लिए कि हवाई पट्टी पर पाकिस्तानी सैनिकों का क़ब्ज़ा तो नहीं हो गया था, दो बार बहुत नीचे उड़ान भरी. प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की तरफ़ से उन्हें साफ़ निर्देश थे कि अगर उन्हें ये लगे कि हवाई पट्टी पर पाकिस्तान का नियंत्रण हो गया है तो वो वहाँ पर अपना विमान न उतारें."
"बीजू पटनायक ने विमान को ज़मीन से कुछ ही मीटर ऊपर उड़ाते हुए देखा कि विमान पट्टी पर एक भी शख़्स मौजूद नहीं था. उन्होंने अपने विमान को नीचे उतारा और वहाँ पहुंचे 17 भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी हमलावरों को खदेड़ने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई."
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