Monday, December 31, 2018

2019 में मंडल-कमंडल महा-मुक़ाबला पार्ट-2 होगा?

25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ मंदिर में पूजा करने के बाद विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी जिस 'राम रथ' को लेकर देश भर की यात्रा पर निकले थे, उस पर काली दाढ़ी वाले एक व्यक्ति भी सवार नज़र आते थे.

आडवाणी के रथ पर सवार वही स्वयंसेवक करीब 24 साल के सियासी सफ़र के बाद 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने.

नरेंद्र मोदी तब आडवाणी के रथ पर सवार थे, लेकिन अब वे सत्ता के शीर्ष पर हैं, इसलिए रथ पर सवारी की ज़िम्मेदारी अभिभावक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने संतों-महंतों को सौंप दी है.

वैसे भी अयोध्या का आंदोलन विश्व हिंदू परिषद चलाती रही है. सिर्फ़ अगस्त 1990 से 6 दिसंबर 1992 तक आडवाणी ने इसकी कमान संभाली थी.

सितंबर 1990 में आडवाणी की रथ यात्रा शुरू होने से एक महीने पहले देश में एक और बड़ी घटना हुई थी, अगस्त महीने में तब के प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने अन्य पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने की मंडल आयोग की सिफ़ारिशों को लागू करने का ऐलान किया था. दस साल धूल खा रही बीपी मंडल की रिपोर्ट ने राजनीति में भूचाल ला दिया.

वीपी सिंह की राष्ट्रीय मोर्चा सरकार दो बैसाखियों पर टिकी थी, एक ओर वामपंथी और दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी, दोनों उनकी सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे थे.

मंडल आयोग की सिफ़ारिशें लागू करने की वीपी सिंह की घोषणा ने बीजेपी को सकते में डाल दिया, लेकिन बीजेपी ने राजीव गांधी की तरह तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी.

बीजेपी के नेता देश की राजनीति में जाति की पेचीदगियों को समझते हैं, और तब भी समझते थे. राजीव गांधी ने तो वीपी सिंह की तुलना जिन्ना से करते हुए, मंडल आयोग की सिफ़ारिशों का ज़ोरदार विरोध किया.

लेकिन मंडल आयोग की सिफ़ारिशों के दूरगामी राजनीतिक असर की काट के लिए बीजेपी ने 'हिंदू एकता' का नारा देते हुए राम मंदिर का आंदोलन तेज़ कर दिया.

1990 के अंतिम चार महीनों में मंडल विरोध और मंदिर आंदोलन से पूरे देश का राजनीतिक माहौल गरम गया.

पांच हफ़्ते तक 'बाबर की औलादों' को धमकाते हुए, हर दिन अलग-अलग जगहों पर छह जनसभाएं करते हुए, तनावपूर्ण सांप्रदायिक माहौल में जब आडवाणी का रथ बिहार पहुंचा, तो सिर्फ़ 8 महीने पहले मुख्यमंत्री बने लालू यादव ने उन्हें सिंचाई विभाग के मसानजोर गेस्ट हाउस में बंद करा दिया.

जनता दल के नेता लालू यादव की इस कार्रवाई का असर ये हुआ कि बीजेपी ने वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लिया, बहुमत खोने के बाद नवंबर 1990 में उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा.

नौ नवंबर 1990 को वीपी सिंह ने कहा कि वे सामाजिक न्याय के पक्ष में, और सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ लड़ाई में अपनी गद्दी कुर्बान कर रहे हैं.

मार्के की बात ये है कि बीजेपी ने मंडल आयोग की सिफ़ारिशों के विरोध में वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस लेने की बात तो दूर, कभी उसका खुलकर विरोध भी नहीं किया, बल्कि हमेशा ही जातियों में बंटे समुदायों को हिंदू धर्म के नाम पर जोड़ने की राजनीति की, जो मुसलमानों की बात किए बिना पूरी नहीं हो पाती.

इसी टकराव को मीडिया ने मंडल बनाम कमंडल का नाम दिया, कई सालों तक सतह के नीचे दबे रहने के बाद यह टकराव एक बार फिर उभरता दिख रहा है जो 2019 के चुनाव में ज़ोरदार ढंग से सामने आ सकता है.

इन दो धाराओं का टकराव ज़रूर होगा, भले मोदी अभी राम मंदिर के मुद्दे पर आक्रामक नहीं हैं लेकिन आगे-आगे देखिए होता है क्या. मंदिर के मामले को गरमाने का काम अभी संघ के दूसरे सिपाही कर रहे हैं.

मोदी अभी दूसरी 'दवाइयों' का असर परखेंगे उसके बाद ज़रूरत के हिसाब से अयोध्या अस्त्र का इस्तेमाल करेंगे.

वैसे इस चुनाव में नरेंद्र मोदी खुद अयोध्या से कम बड़ा मुद्दा नहीं हैं.

हिंदुत्व बनाम सामाजिक न्याय के टकराव के समानांतर, एक और टकराव साफ़ देखने को मिलेगा. वह होगा मोदी बचाओ बनाम मोदी हटाओ.

Wednesday, December 26, 2018

48MP कैमरा और Punch Hole डिस्प्ले के साथ Honor V20 लॉन्च

चीनी कंपनी हुआवे की सबसिडरी Honor  ने V20  लॉन्च कर दिया है. इस स्मार्टफोन की डिस्प्ले में होल दिया गया है. कंपनी का दावा है कि यह दुनिया का पहला स्मार्टफोन है जिसकी डिस्प्ले में होल दिया गया है. दरअसल इस होल में कंपनी ने फ्रंट कैमरा दिया है, ताकि फुल डिस्प्ले दी जा सके.

इस स्मार्टफोन की दूसरी खासियत इसमें दिया गया 48 मेगापिक्सल का कैमरा. इस स्मार्टफोन को कंपनी ने हाल ही में शोकेस किया था. अब इसकी कीमतें भी सामने आ गई हैं. Honor V20 के बेस वेरिएंट कीमत 2999 युआन (लगभग 30,000 रुपये) है. जबकि दूसरे वेरिएंट में की कीमत 3499 युआन (लगभग 35,500 रुपये) है. इस स्मार्टफोन का स्पेशल Moschino एडिशन भी लॉन्च हुआ है जिसमें 8GB रैम के साथ 256GB इंटरनल मेमोरी दी गई है. इसकी कीमत 3999 युआन (लगभग 40,000 रुपये) है.

इस स्मार्टफोन की ग्लोबल लॉन्चिंग 22 जनवरी को पेरिस में होगी और इसे ग्लोबल Honor View 20 नाम से लॉन्च किया जाएगा. भारत में भी इसी वक्त इसे पेश किया जा सकता है, लेकिन कंपनी ने इसे कन्फर्म नहीं किया है.

स्पेसिफिकेशन्स की बात करें तो इसमें 6.4 इंच की फुल एचडी डिस्प्ले दी गई है और इसमें Kirin 980 प्रोसेसर दिया गया है. इस स्मार्टफोन में 8GB रैम दिया गया है. इस स्मार्टफोन में पंच होल डिस्प्ले है यानी स्क्रीन के टॉप लेफ्ट में छोटा कटआउट है जिसमे कैमरा है. फ्रंट कैमरा 25 मेगापिक्सल का है. इस फोन में रियर फिंगरप्रिंट स्कैनर दिया गया है.

फोटॉग्रफी के लिए इसमें 48 मेगापिक्सल का मुख्य कैमरा है. कंपनी ने इसमें SONY IMX 586 सेंसर यूज किया है जिसके तहत पिक्सल बाइनिंग टेक्नॉलजी से चार 0.8 माइक्रॉन पिक्सल को मिला कर लार्ज 1.6 माइक्रॉन पिक्सल दिया जाएगा. इसमें दिए गए चिपसेट की वजहे से 48 मेगापिक्सल AI HDR मोड मिलेगा जिससे हाई डेफिनिशन इमेज क्रिएट होंगी.

इस स्मार्टफोन में 4,000mAh की बैटरी दी गई है और कंपनी के मुताबिक ये स्मार्टफोन सुपर फास्ट चार्ज टेक्नॉलजी सपोर्ट करती है. इसमें Android Pie बेस्ड Magic UI 2.0 दिया गया है. हालांकि इसके ग्लोबल वर्जन में EMUI 9.0 दिया जाएगा.

कंपनी ने इसके साथ लिंक टर्बो फीचर दिया है. इसके जरिए बेहतर नेटवर्क स्पीड को देखते हुआ आपका स्मार्टफोन वाईफाई से LTE और LTE से वाईफाई में कनेक्ट होगा. ये फीचर स्मार्टफोन में दिए AI के तहत काम करता है और यूजर बिहेवियर को समझते हुए नेटवर्क चेंज करता है. यानी अगर मोबाइल इंटरनेट फास्ट है और वाईफाई स्लो तो ऐसे में ये स्विच करके LTE मे चला जाएगा. ये कंपनी का दावा है.

Sunday, December 16, 2018

श्रीलंका में प्रधानमंत्री पद पर फिर लौटे रानिल विक्रमसिंघे

श्रीलंका में जारी राजनीतिक उठापटक में अब रानिल विक्रमसिंघे ने फिर से प्रधानमंत्री पद पर वापसी की है.

अक्तूबर में प्रधानमंत्री पद से हटाए जाने के बाद रविवार को उन्होंने फिर से पद की शपथ ली.

विक्रमसिंघे के दोबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद इस द्वीपीय देश में जारी राजनीतिक संकट के भी समाप्त होने के संकेत मिले हैं.

राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने रानिल विक्रमसिंघे को फिर से प्रधानमंत्री न बनाने का प्रण लिया था. लेकिन अचानक बदले घटनाक्रम में रविवार को विक्रमसिंगे फिर से प्रधानमंत्री बना दिए गए.

सेना को अस्थायी बजट लागू करने के लिए एक जनवरी से पहले संसद की मंज़ूरी लेना आवश्यक था और इसी वजह से उन्हें अपना रुख बदलना पड़ा है.

पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने सरकार के ठप्प होने की आंशकाओं के मद्देनज़र शनिवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. राजपक्षे संसद में बहुमत साबित नहीं कर सके थे.

ये पांचवीं बार है जब विक्रमसिंघे ने श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली है लेकिन इससे पहले वो एक भी बार कार्यकाल पूरा नहीं कर सके हैं.

रविवार को हुए शपथ समारोह में मीडिया को नहीं बुलाया गया था और इसमें विक्रमसिंघे के गठबंधन के कुछ ही नेता शामिल थे.

अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में राष्ट्रपति मैत्रीपाल श्रीसेना ने मतभेदों की वजह से अपने प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को पद से हटा दिया था.

इसके बाद उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी और पूर्व राष्ट्रपति रहे महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई गई थी लेकिन राजपक्षे संसद में बहुमत साबित नहीं कर सके.

राष्ट्रपति कार्यालय और संसद के बीच गतिरोध की वजह से श्रीलंका में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था.

वहीं एक निचली अदालत ने राजपक्षे और उनकी मंत्रिपरिषद के काम करने पर रोक लगा दी थी. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के फ़ैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.

Monday, December 10, 2018

कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम होंगे देश के नए मुख्य आर्थिक सलाहकार, 3 साल का होगा कार्यकाल

हैदराबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के प्रोफेसर कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम को देश का नया मुख्य आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया गया है. उनका कार्यकाल 3 वर्ष का होगा. सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

बता दें कि अरविंद सुब्रमण्यम ने इस साल जुलाई में व्यक्तिगत कारणों से मुख्य आर्थिक सलाहकार पद से इस्तीफा दे दिया था. अरविंद सुब्रमण्यम ने अक्टूबर, 2014 में मुख्य आर्थ‍िक सलाहकार का पद संभाला था. उन्होंने रघुराम राजन की जगह ली थी. इस दौरान रघुराम राजन आरबीआई गवर्नर बने थे. अरविंद सुब्रमण्यम ने का कार्यकाल मई 2019 तक था.

सुब्रमण्यम शिकागो बूथ से पीएचडी हैं और आईआईटी और आईआईएम के छात्र भी रह चुके हैं.  सुब्रमण्यम की गिनती दुनिया के टॉप बैंकिंग, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और इकनॉमिक पॉलिसी एक्सपर्ट में होती है. एकेडमिक करियर की शुरुआत से पहले सुब्रमण्यम न्यूयॉर्क में जेपी मॉर्गन चेज के साथ कंसल्टेंट के तौर पर काम कर चुके हैं.

वहीं मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतगणना की वेबकास्टिंग न करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह निर्देश जारी किए गए हैं कि काउंटिग हॉल में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और मतगणना के दौरान वाईफाई का इस्तेमाल न हो.

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले मध्य प्रदेश के एक निजी होटल में ईवीएम मशीन और सागर जिले में बिना नंबर की स्कूल बस से स्ट्रॉन्ग रूम में ईवीएम पहुंचाए जाने का वीडियो जारी करते हुए कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि बीजेपी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जनादेश को पटलने की कोशिश कर रही है. वहीं, एक अन्य मामले में शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में लगभग एक घंटे के लिए बिजली नहीं होने की वजह से स्ट्रॉन्ग रूम का सीसीटीवी और एलईडी डिस्प्ले इस अवधि में काम नहीं कर पाया.

इन शिकायतों पर चुनाव आयोग ने भी माना है कि मध्य प्रदेश में ऐसी दो घटनाएं हुईं थीं जिसमें ईवीएम को लेकर नियमावली का पालन नहीं किया गया. लेकिन आयोग का कहना था कि यह गलती प्रक्रिया तक ही सीमित है और मशीनों से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई. लेकिन आयोग ने एक अधिकारी को मशीने देरी से जमा कराने के आरोप में सस्पेंड कर दिया.

Tuesday, December 4, 2018

एक और 'पप्पू' जो 18 वर्षों से कर रहा है ओडिशा पर राज

भारतीय राजनीति में सिर्फ़ सिक्किम के मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग अकेले राजनेता हैं जो नवीन पटनायक से अधिक समय तक इस पद पर बने रहे हैं.

नवीन के बारे में मशहूर है कि वो शायद भारत के सबसे चुप रहने वाले राजनेता हैं जिन्हें शायद ही किसी ने आवाज़ ऊंची कर बात करते सुना है.

हाल ही में नवीन पटनायक की जीवनी लिखने वाले अंग्रेज़ी पत्रिका आउटलुक के संपादक रूबेन बैनर्जी बताते हैं, "आप उनसे मिलेंगे तो पाएंगे कि उनसे बड़ा सॉफ़्ट स्पोकेन, शिष्ट, सभ्रांत और कम बोलने वाला शख़्स है ही नहीं. कभी कभी तो लगता है कि वो राजनेता हैं ही नहीं. लेकिन सच ये है कि उनसे बड़े राजनीतिज्ञ बहुत कम लोग हैं."

"वो न सिर्फ़ राजनीतिज्ञ हैं बल्कि निर्मम राजनीतिज्ञ हैं. इस हद तक कि पहुंचे हुए राजनीतिज्ञ भी उनका मुक़ाबला नहीं कर सकते. कुछ लोग कहते हैं कि राजनीति उनकी रगों में है. लेकिन ये भी सच है कि अपने जीवन के शुरुआती 50 सालों में उन्होंने राजनीति की तरफ़ रुख़ नहीं किया. लेकिन एक बात पर किसी का मतभेद नहीं हो सकता कि नवीन बहुत चालाक हैं. ओडिशा में उनकी टक्कर का राजनेता दिखाई नहीं देता."

नवीन पटनायक को राजनीति विरासत में मिली थी. उनके पिता बीजू पटनायक न सिर्फ़ ओडिशा के मुख्यमंत्री थे बल्कि जाने माने स्वतंत्रता सेनानी और पायलट थे.

बीजू पटनायक का योगदान
बीजू पटनायक के जीवनीकार सुंदर गणेशन अपनी किताब 'द टॉल मैन' में लिखते हैं, "बीजू पटनायक ने दिल्ली की सफ़दरजंग हवाई पट्टी से श्रीनगर के लिए अपने डकोटा डी सी-3 विमान से कई उड़ाने भरी थीं. 17 अक्तूबर 1947 को वो लेफ़्टिनेंट कर्नल देवान रंजीत राय के नेतृत्व में 1-सिख रेजिमेंट के 17 जवानों को लेकर श्रीनगर पहुंचे थे."

"उन्होंने ये देखने के लिए कि हवाई पट्टी पर पाकिस्तानी सैनिकों का क़ब्ज़ा तो नहीं हो गया था, दो बार बहुत नीचे उड़ान भरी. प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की तरफ़ से उन्हें साफ़ निर्देश थे कि अगर उन्हें ये लगे कि हवाई पट्टी पर पाकिस्तान का नियंत्रण हो गया है तो वो वहाँ पर अपना विमान न उतारें."

"बीजू पटनायक ने विमान को ज़मीन से कुछ ही मीटर ऊपर उड़ाते हुए देखा कि विमान पट्टी पर एक भी शख़्स मौजूद नहीं था. उन्होंने अपने विमान को नीचे उतारा और वहाँ पहुंचे 17 भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी हमलावरों को खदेड़ने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई."

Monday, November 19, 2018

जब अमेज़ॉन आपके पड़ोस में आ जाए

संगीतकार पैट इरविन 1984 से न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड सिटी के निवासी हैं. वह कहते हैं, "हम हमेशा से जानते थे कि यह बदलने वाला है. लेकिन ऐसे बदलेगा, यह पता नहीं था."

न्यूयॉर्क के क्वीन्स में लॉन्ग आइलैंड सिटी को कभी बंजर औद्योगिक भूमि समझा जाता था. आज यह अमरीका का सबसे तेज़ी से उभरता हुआ मुहल्ला है.

यहां यह तेज़ी बरकरार रहने वाली है. 14 महीने की प्रतियोगिता जिसमें उत्तर अमरीका के कई शहरों ने बोलियां लगाई थीं, के बाद ऑनलाइन रीटेल कंपनी अमेज़ॉन ने अपने दो मुख्यालयों में से एक का निर्माण यहां करने का एलान किया है.

अमेज़ॉन ने अगले 15 साल में 3.6 अरब डॉलर के निवेश और 40,000 नौकरियों का वादा किया है.

बदले में न्यूयॉर्क की शहर और राज्य सरकारों ने प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन पैकेज की पेशकश की है जो 2.8 अरब डॉलर तक की हो सकती है.

आपको ये भी रोचक लगेगा
मोदी को अवतार मानने वाले 'विवादित' आहूजा की टीस
भारत को लेकर किस रेस में हैं सऊदी अरब और ईरान
'केसरी को हटाने की साज़िश प्रणब के घर रची गई'
असली 'ठग्स ऑफ़ हिंदुस्तान' जिनसे डरते थे अंग्रेज़
अमेज़ॉन की घोषणा ने लॉन्ग आइलैंड सिटी के पुराने बाशिंदों को भावुक कर दिया है. कई लोग उन दिनों को याद करते हैं कि जब यहां शांति होती थी. लोग कुछ ही जगहों पर रहते थे.

कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि अमेज़ॉन के निवेश से नौकरियां पैदा होंगी और बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा. कुछ दूसरे लोग कहते हैं कि वे नये घटनाक्रम से अचंभित हैं और यह नहीं जानते कि यहां का किराया बढ़ेगा तो वे कहां जाएंगे.

65 साल के स्थानीय निवासी जिम ढिल्लन कहते हैं, "मैं जिनको जानता हूं उनके लिए नौकरी सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है. कामकाजी वर्ग के लिए नौकरियां चाहिए. कोई भी नौकरी कुछ ना होने से बेहतर है."

यह शख़्स हर दिन प्लेन से पहुंचता है ऑफिस
बॉस की हां में हां मिलाना कितना फ़ायदेमंद
संपत्ति की क़ीमतों में उछाल

क्वीन्स में लॉन्ग आइलैंड सिटी पहले से ही सबसे महंगी जगह है.

प्रॉपर्टी वेबसाइट स्ट्रीटइज़ी के मुताबिक यहां एक औसत घर की कीमत 7,69,000 डॉलर है और औसत किराया 2450 डॉलर महीना है.

यहां दाम घटने की कोई संभावना नहीं है. अमेज़ॉन के आने की ख़बर ने यहां के प्रॉपर्टी वेबसाइट पर ट्रैफ़िक बढ़ा दिया है.

मॉडर्न स्पेसेज़ रियल्टी के सीईओ एरिक बेनैम ने अपने यहां फ़ुट ट्रैफिक में 400 फ़ीसदी का इजाफ़ा नोट किया है.

हालांकि इस बारे में लोगों के अनुमान अलग हैं कि यह कदम न्यूयॉर्क सिटी को कैसे प्रभावित करेगा.

एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेज़ॉन के आने से न्यूयॉर्क के लोगों के लिए सालाना किराये में 1.4 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक इसमें 0.1 फ़ीसदी से कम की बढ़ोतरी होगी.

Friday, November 16, 2018

पीयूष मिश्रा ने क्याें छोड़ दी थी राजश्री की 'मैंने प्यार किया'?

दिल्ली के इंडिया गेट स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित साहित्य आजतक के एक अहम सत्र में गीतकार, अभिनेता पीयूष मिश्रा ने शिरकत की. उन्होंने जहां अपने बारे में कई दिलचस्प बातें जाहिर कीं, वहीं अपने चर्चित गीतों से समां बांधा.

कार्यक्रम में हिस्सा लेने के ल‍िए यहां रज‍िस्टर करें...

पीयूष मिश्रा ने बताया कि उन्हें सलमान खान और भाग्यश्री स्टारर सुपरहिट फिल्म मैंने प्यार किया ऑफर हुई थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दी थी. पीयूष ने बताया- मुझे नहीं पता कि मैंने ये फिल्म क्यों नहीं की. फिल्म के डायरेक्टर सूरज बड़जात्या ने मुझे मिलने बुलाया था, लेकिन मैं नहीं गया. फिल्म की लीड एक्ट्रेस फाइनल हो चुकी थी, एक्टर फाइनल होना था. बड़जात्या मुझे लॉन्च करना चाहते थे, उस समय मैं खूबसूरत दिखता था, लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं फिल्म में काम क्यों नहीं किया. मैं बेवकूफ नहीं जो फिल्म छोड़ देता, लोग कहते हैं कि मैंने थिएटर के कारण छोड़ दी, ऐसा नहीं है.

पीयूष ने कहा- " मुझे इस बात का अफसोस नहीं है. नहीं की तो नहीं की. मैंने कभी नहीं सोचा कि यदि फिल्म मैंने की होती तो क्या होगा. कैसा करियर होता." बता दें कि पीयूष को वही भूमिका ऑफर की गई थी, जो सलमान खान ने निभाई. फिल्म काफी पॉपुलर हुई थी. ये सलमान खान की बतौर लीड एक्टर पहली फिल्म थी.

एक सवाल के जवाब में पीयूष मिश्रा ने कहा, "यार पंगा है मेरे साथ. मेरे साथ क्या था? मुझे अब लगने लगा है कि अगर डिसऑर्डर न हो तो आदमी कुछ क्रिएट नहीं कर पाता है. मेरे अंदर एक पागलपन था. जिसकी वजह से लोग मुझे बहुत प्यार करते थे. अब वो अच्छी जुबान शांत हो गई. मुझे लगता है अब मेरे लिए लोगों की पसंद घट गई है. डगमगाए रहो तो लोग प्यार करते हैं."

पंजाब के फिरोजपुर में जैश ए मोहम्मद के 6 से 7 आतंकवादियों के होने का खुलासा हुआ है. माना जा रहा है कि ये आतंकी इसी इलाके में हैं और दिल्ली की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.

पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस के इनपुट के बाद भारत-पाक सीमा पर सख्ती और सतर्क रहने का अलर्ट जारी किया गया है. बुधवार को पंजाब के पठानकोट के माधोपुर से चार संदिग्धों के द्वारा लूटी गई कार को भी इसी आतंकी हमले की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है और पूरे पंजाब में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है.

माना जा रहा है कि ये आतंकी सड़क मार्ग से दिल्ली की तरफ आकर कोई बड़ी वारदात कर सकते हैं और दिल्ली ना पहुंचने की स्थिति में पंजाब में भी कोई बड़ा आतंकी हमला हो सकता है. वहीं, पंजाब पुलिस की तरफ से जारी हुए अलर्ट की जानकारी के बाद दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और दिल्ली पुलिस भी अलर्ट हो गई है.

Tuesday, November 6, 2018

आरबीआई सरकार का सीट बेल्ट, केंद्र की मर्जी पहने या उतार देः राजन

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर जारी टकराव के बीच केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने महत्वपूर्ण सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थिति में आरबीआई की भूमिका राहुल द्रविड़ की तरह धीर-गंभीर फैसले लेने वाले की होनी चाहिए न कि नवजोत सिंह सिद्धू की तरह बयानबाजी करने वाले की। 

हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को दिए साक्षात्कार में राजन ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में केंद्रीय बैंक की भूमिका कार की सीट बेल्ट की तरह है, जो दुर्घटना रोकने के लिए जरूरी होता है। राजन ने केंद्रीय बैंक तथा केंद्र सरकार के बीच मतभेदों, सेक्शन सात के इस्तेमाल, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) संकट, प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (पीसीए), केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) का नोटिस तथा आरबीआई के बोर्ड सहित कई मुद्दों पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। आइए जानते हैं, उन्होंने किस मुद्दे पर क्या कहा? 

रुपये की अस्थिरता 
रुपये का सही स्तर क्या हो, इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता। फोकस रुपये के स्तर पर नहीं, बल्कि उन चीजों पर होना चाहिए, जो इसे उपयुक्त स्तर पर रखने में सहायक हो। 

सेक्शन सात
राजन ने कहा कि सेक्शन सात का इस्तेमाल नहीं किया जाना अच्छी खबर है। अगर सेक्शन 7 का इस्तेमाल किया गया, तो दोनों के बीच संबंध बदतर हो जाएंगे, जो चिंता की बात होगी। आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच बातचीत जारी है और दोनों एक दूसरे का सम्मान करते हुए काम करते हैं। इस बात से सहमत हूं कि आरबीआई सरकार की एक एजेंसी है, लेकिन इसे कुछ खास कर्तव्य सौंपा गया है। बातचीत सम्मान के आधार पर होनी चाहिए। उन्हें एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र का ध्यान रखना पडे़गा और जब इसमें दखलअंदाजी होगी तो समस्या होगी। उम्मीद है कि आरबीआई के अधिकार क्षेत्र का सम्मान होगा। 

आरबीआई बनाम केंद्र सरकार 
पूर्व गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक ड्राइविंग सीट पर बैठी केंद्र सरकार के सीट बेल्ट की तरह है। यह फैसला सरकार को करना है कि वह सीट बेल्ट पहनना चाहती है या नहीं। सीट बेल्ट पहनने से दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से बचाव में सहायता मिलती है। सरकार विकास को बढ़ावा देने के बारे में सोचती है, तो आरबीआई वित्तीय स्थिरता पर फोकस करता है। आरबीआई के पास ना कहने का अधिकार है क्योंकि वह स्थिरता बरकरार रखने के लिए जिम्मेदार है। यह राजनीतिक प्रदर्शन या अपना हित साधने का साधन नहीं है। केंद्र और आरबीआई एक दूसरे के विचारों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन फिर भी एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र का सम्मान करना होगा। 

यह भी पढ़ेंः इन 10 मुद्दों पर RBI और सरकार के बीच खिंचीं तलवारें

एनबीएफसी की तरलता पर बहस
वित्तीय संकट की स्थिति में आरबीआई को फैसला लेना होगा कि एनबीएफसी तरलता की समस्या से जूझ रही है या सॉल्वेंसी के मुद्दे से। करदाताओं के पैसे से निजी इकाइयों को बेल आउट करने से समस्याएं खड़ी होंगी। एनबीएफसी की तरलता के मुद्दे को सुलझाने के लिए ओएमओ एक बढ़िया विचार है। बैंकों को एनबीएफसी को बॉन्ड की गारंटी देने के लिए मंजूरी देना बढ़िया विचार है। उन इकाइयों के जरिए लोन देना, जो एनबीएफसी को सीधे लोन दे सकते हैं, बढ़िया विचार है। एनबीएफसी के लिए कोई भी हस्तक्षेप परेशानी में फंसी खुद कंपनियों के बीच से आना चाहिए।

रोलओवर के लिए चिंतित कंपनियों को बैलेंस शीट को सुधारने के लिए अब इक्विटी बढ़ाने का समय है। केंद्र सरकार के पास बेल आउट के लिए जाना एनबीएफसी के पास अंतिम विकल्प होना चाहिए। 

आरबीआई के लाभांश पर सरकार का अधिकार 
राजन ने कहा कि जब से यह मुद्दा विवादित हुआ, इस पर कई बार व्यापक रूप से चर्चा का प्रयास हुआ। बजट नजदीक आने पर लाभांश पर चर्चा करना और मुश्किल हो जाता है। मैं लाभांश को एक क्लीनर व मैकेनिकल प्रोसेस बनाना चाहता था, लेकिन यह नहीं हो पाया। आरबीआई की इक्विटी का वैल्यू केंद्र की संपत्ति है, आरबीआई सरकार की सब्सिड्यरी है। भारत के पास 'बीएए' रेटिंग है और वह केवल इसी रेट पर कर्ज ले सकता है। आरबीआई के इक्विटी की रेटिंग 'एएए' है।

उन्होंने कहा कि आरबीआई को अलग से पूंजी से भरपूर इकाई बनाए रखने से वैश्विक बाजारों में इसका उसे फायदा मिल सकता है। अकाउंटेंट ने आरबीआई को मुनाफे से अधिक लाभांश नहीं देने की सलाह दी है, क्योंकि डिविडेंड अकाउंटिंग, क्रेडिट वर्थिनेस और आरबीआई द्वारा रुपये की छपाई से लाभांश देना मुश्किल हो जाता है। हाल में रुपये में आए अवमूल्यन की वजह से आरबीआई की इक्विटी की वैल्यू बढ़ी है। सरकार को आरबीआई मुनाफे से अधिक लाभांश नहीं दे सकती है। अगर आरबीआई सरकार को मुनाफे से अधिक लाभांश देती है, तो मुद्रास्फीति के हालात पैदा होंगे। अगर लाभांश के बदले उसी अनुपात में सरकार उसे बॉन्ड की बिक्री करती है, तो इससे मुद्रास्फीति के हालात पैदा नहीं होते। 

Thursday, November 1, 2018

सरकार बताए भगत सिंह शहीद हैं या नहीं'

केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने गृह मंत्रालय से कहा है कि भगत सिंह को शहीद का दर्जा देने के बारे में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए.

सीआईसी ने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जा सकता तो सरकार इसका विस्तृत स्पष्टीकरण भी दे.

दरअसल, एक आरटीआई में भगत सिंह को शहीद का दर्जा देने के बारे में जानकारी मांगी गई थी. आवेदक ने पूछा कि क्या भगत सिंह को क्रांतिकारी का दर्जा नहीं दिया जा सकता है या नहीं और इसकी क़ानूनी सीमाएं क्या हैं.

सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने आरटीआई के आधार पर कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों को सरकार कई तरह की सुविधाएं और पेंशन देती है, लेकिन भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों को शहीद का दर्जा ही नहीं मिला है.

उन्होंने बताया कि आवेदक ने सबसे पहले राष्ट्रपति भवन को आरटीआई भेजी थी. राष्ट्रपति भवन ने गृह मंत्रालय को जानकारी देने के लिए कहा. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आवेदक ने केंद्रीय सूचना आयोग का रुख किया.

श्रीधर आचार्युलु ने कहा, "भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को शहीद घोषित करने की मांग हर साल उनकी सालगिरह और बरसी पर उठती है. पंजाब सरकार ने सरबजीत सिंह को राष्ट्रीय शहीद घोषित किया है, जिनकी कोट लखपत जेल में मौत हो गई थी. लेकिन भगत सिंह और बाक़ी क्रांतिकारियों की अनदेखी की गई."

दिल्ली में भारी प्रदूषण के बीच 40 लाख पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण की शिकायतें दर्ज कराने के लिए उसने ट्विटर और फेसबुक पर अकाउंट खोले हैं. वहीं सड़कों पर वाहनों की धरपकड़ के लिए टीमें बनाई गई हैं.

दिल्ली सरकार के वकील ने न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाले पीठ को बताया कि दिल्ली में 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल के 40 लाख पुराने वाहनों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है.

पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि कम से कम 15 दिनों तक प्रदूषण की मार झेलने के लिए तैयार रहना होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह उस याचिका पर विचार करेगा जिसमें कहा गया है कि आपराधिक मामले में दोषी करार दिए जाने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर ताउम्र बैन लगाया जाना चाहिए.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी मांग से न भटकें.

याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की अर्जी में कहा गया है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा-8 (3) के मुताबिक अगर किसी को दो साल से ज्यादा सजा होती है तो वह सजा काटने के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता. याचिका में कहा गया है कि जैसे ही नेता को आपराधिक मामले में दोषी करार दिया जाता है उसे उम्रभर के लिए चुनाव लड़ने पर बैन किया जाना चाहिए.

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार शरणार्थी शिविरों के नियमों में बदलाव करने की योजना को अंतिम रूप दे रही है. ट्रंप ने ये बात ऐसे वक्त में कही है जब कुछ दिन बाद ही अमरीका में मध्यावधि चुनाव होने हैं.

व्हाइट हाउस में एक भाषण के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अवैध प्रवासी शरणार्थी शिविरों का गलत फायदा उठाते हैं. उन्होंने कहा कि मेक्सिको से लगने वाली सीमा पर दीवार बनने के बाद प्रवासियों को वैध बंदरगाहों से ही आने की अनुमति मिलेगी.

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "प्रवासियों को वैध तरीके से ही शरणार्थी शिविरों में आने की अनुमति मिलेगी. जो हमारा कानून तोड़ेंगे और गैर कानूनी तरीके से घुसने की कोशिश करेंगे, उन्हें देश में घुसने नहीं दिया जाएगा. ज़रूरत पड़ने पर हम उन्हें लंबे समय तक रोक कर रखेंगे. जब इस लोगों को घुसने नहीं दिया जाएगा, तो वो धीरे-धीरे खुद ही यहां आना बंद कर देंगे."