Sunday, February 24, 2019

同婚平权争议继续 台湾首部法律草案触及雷区

喧嚣台湾社会一段时日的同志婚姻立法之路,有初步进程。台湾行政院21日向立法院提交《司法院释字第748号解释施行法》(下称草案),其中提出,相同性別二人也享有婚姻自由。

根据该草案,提到“为使相同性別之二人,得为经营共同生活之目的,成立具有亲密性及排他性之永久结合关系,以达成婚姻自由之平等保护,特制定本法。”

该草案将交立法院审议,如遭否决,根据去年台湾大法官释宪会议的决议,同志可以从2019年5月24号开始,依据现有台湾法律成婚。

此草案内容与现有台湾一夫一妻制中,配偶双方都须遵循的法律义务及权力大部分相同,包含医疗权、财产继承权,或共同扶养血缘子女等。

“聪明之举”
台媒报导表示,之前传出的《同性婚姻法》或反同阵营提出的《同性共同生活法》都因为正反双方反弹而没被采用。因此有评论指出,此次政府采取《司法院释字第748号解释施行法》之中性名称,是聪明之举。

台湾民进党主席卓荣泰说,此法案名称中性,是“智慧不起烦恼。”反同阵营则谴责民进党政府玩弄文字游戏。

此次立法,也引起中国网民关注。台湾官媒中央社报导,中国网民恭贺同性婚姻合法,有网民询问,“大陆的能过去结婚吗?有没有什么要求啥的?” “希望大陆也不需要等太久。”

台湾陆委会副主委邱垂正昨日于记者会表示,一旦同婚专法三读通过,陆委会绝对会站在尊重人权角度,一视同仁研议配套措施。“不可能全世界的同志都可以与台湾同志配偶结婚,两岸、台港澳却差别对待,”他说。

虽然台湾法律规定,两岸人民通婚前,须先在”大陆民政部门或其指定的机关“登记结婚,携带大陆结婚证来台,申请面谈等多重程序。但由于中国现在不承认同性婚姻,后续配套问题仍须长期讨论。

此草案在亚洲开创先河,也引起国际关注。欧盟在台湾官方机构“欧盟在台台经贸协会”于官方脸书帐号祝贺此草案。

一向支持同性恋群体权益的行政院院长苏贞昌以及副院长陈其迈都在社交媒体上表示,民进党政府希望该草案能获通过,以平息正反双方之歧见。

去年台湾公投期间,反同方提出订立同志婚姻专法,同时反对修改民法,获得700多万民众赞成。另外则有300多万民众支持同志婚姻,表示应该修改民法。

但在数月后,台湾最大反同团体“护家盟” 转而对订立同志婚姻专法提出批评,认为政府提交的草案会给予同性恋者与异性恋者几乎相同之权益。

护家盟的声明指出,许多研究表示同志不是天生,是能够“矫正治疗”的。同性恋是行为偏差,影响青少年,其散播途径形同传染病,因此,同性伴侣领养小孩,陷儿童权益于不义,因为同志家庭问题比异性恋家庭多。

以保守教会为骨干的护家盟解释,此草案特地说明个人宗教自由不会受影响,但同志婚姻已然违逆宗教信仰价值。

“台湾伴侣权益推动联盟”则批评这些年来同志受资源庞大的反同团体“霸凌” 。“反同团体这几年来的状态就像一个填不满的无底洞,给他3分,他就要5分,给他5分,他就要10分,一个永远无法讨好、无法满足的黑洞,扭曲与挟持公投结果施压政府。”伴侣盟强调。

“婚姻平权大平台”副召集人邓竺媛接受BBC 中文采访表示,现在的草案不完全符合同志团体一开始的希望,因为其中对同性伴侣的权益有所限制。

邓竺媛解释,接下来根据此专法的的修法甚至诉讼过程,会耗费法律资源及时间。但她表示,此次过程可以看到政府在保守团体压力下,尽量立法让同性伴侣婚姻权益趋近异性恋伴侣,同志团体仍然感激。

Tuesday, February 19, 2019

अब 25 करोड़ रुपए तक के निवेश पर टैक्स में छूट, टर्नओवर की लिमिट 100 करोड़ रुपए

नई दिल्ली. सरकार ने स्टार्टअप कंपनियों को बड़ी राहत दी है। इन्हें अब 25 करोड़ रुपए तक का निवेश मिलने से जो आय होगी उस पर टैक्स (एंजेल टैक्स) नहीं देना पड़ेगा। पहले यह लिमिट 10 करोड़ रुपए थी। सरकार की ओर से मंगलवार को यह जानकारी दी गई।स्टार्पअप को 30% की दर से एंजेल टैक्स देना पड़ता है।

स्टार्टअप के दायरे में रहने की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। रजिस्ट्रेशन की तारीख से 10 साल तक कंपनी को स्टार्पअप माना जाएगा। पहले 7 साल की सीमा थी।

सरकार ने टर्नओवर की लिमिट भी बढ़ा दी है। सालाना 100 करोड़ रुपए के टर्नओवर तक स्टार्टअप का दर्जा बना रहेगा। पहले 25 करोड़ रुपए से ज्यादा सालाना टर्नओवर होने पर कंपनियां स्टार्टअप के दायरे से बाहर हो जाती थीं।

सरकार ने पिछले साल जनवरी में उभरते उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान लॉन्च किया था। इसका लक्ष्य स्टार्टअप को टैक्स में छूट और इंस्पेक्टर-राज मुक्त व्यवस्था देना है।

औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) ने देशभर में 14,600 स्टार्टअप की पहचान की थी। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 2,587 स्टार्टअप हैं।

क्या है स्टार्टअप ?
ऐसी यूनिट जो इनोवेशन, डेवलपमेंट, नए प्रोडक्ट के कॉमर्शियलाइजेशन, टेक्नोलॉजी या बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) सी जुड़ी सर्विस पर काम करना चाहती है वो स्टार्पअप के तौर पर रजिस्ट्रेशन करवा सकती है।

'आतंकियों को रोक देते हैं'

लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने कहा, "विस्फोटक को लेकर सूचनाएं मिली हैं। हम उसे यहां नहीं बता सकते। आतंकी बहुत सी घटनाओं को अंजाम देना चाहते हैं, लेकिन हम उन्हें रोक देते हैं। पुलवामा हमले के 100 घंटे से भी कम समय में कश्मीर में जैश के नेतृत्व को खत्म कर दिया गया। यह पाक स्थित जैश मुख्यालय से ही संचालित होता था।"

"14 फरवरी को जिस तरह के कार बम से हमला किया गया, ऐसा कश्मीर में लंबे वक्त के बाद हुआ। इस तरह के हमले से निपटने के लिए हमने सभी विकल्प खुले रखे हैं।"
"हमले में घायल हुए ब्रिगेडियर हरदीप सिंह ने अपनी छुट्टियां कम ली हैं। वह मौके पर जाकर ऑपरेशन को लीड करेंगे।"

"ठंड और खराब मौसम के कारण घुसपैठ की घटनाएं बढ़ी हैं, जिन्हें हम रोकने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान घुसपैठ की कोशिश कर रहा है। कश्मीर घाटी में हम आतंकियों को खत्म करने में लगे हैं।"
"हाईवे और सेना के जवानों पर हमला प्लान के तहत किया गया। हम हमले से 3-4 दिन पहले भी उस रास्ते से गए थे, उस वक्त सब सामान्य था। काफिले के दौरान ट्रैफिक के नियमों को बदला जाएगा और अमल में भी लाया जाएगा।"

"कामरान ने पुलवामा में हमला करवाया था। उस घटना के दौरान गाड़ी में विस्फोटक था। पिछले साल हमने 250 से ज्यादा आतंकियों को मारा। वे (आतंकी) लोगों को भर्ती करने में लगे हैं। हम मुख्य रूप से आतंकियों की पहचान करने में लगे हैं। जल्द ही समस्या को खत्म कर दिया जाएगा।"

Wednesday, February 13, 2019

त्रिपुरा: वायरल वीडियो पर बीजेपी महिला मंत्री ने कहा, नहीं हुआ मेरा अपमान

त्रिपुरा के एक बीजेपी नेता पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में एक महिला मंत्री को छूने और उनका अपमान करने का आरोप लगाया जा रहा है.

मामला 9 तारीख को अगरतला में हुई रैली का बताया जा रहा है जब मंच पर प्रधानमंत्री के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री बिप्लब देव भी मौजूद थे.

इस रैली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन रहा है जिसमें त्रिपुरा के मंत्री मनोज कांति देब एक अन्य मंत्री सांतना चकमा की कमर पर हाथ रखते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में सांतना उनका हाथ झटकती दिख रही हैं.

32 साल की सांतना चकमा त्रिपुरा की अकेली महिला विधायक हैं और विधानसभा चुनावों में वामपंथी नेता अरुण कुमार चकमा को हरा कर उत्तरी त्रिपुरा की सीट से जीती थीं.

सांतना प्रदेश की सामाजिक कल्याण मंत्री हैं. मनोज कांति देब युवा मामलों के मंत्री हैं और साथ ही खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग का कार्यभार भी देख रहे हैं.

इस वीडियो को लेकर विपक्ष के कई नेताओं ने भाजपा पर हमला बोला है और कहा है कि भाजपा की सरकार में बेटियां असुरक्षित हैं.

कम्युनिस्ट पार्टी ने मोदी से सवाल किया है कि मंत्री के ख़िलाफ़ कोई कदम क्या नहीं लिया जा रहा.

कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ी ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमन्स एसोशिएशन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अगरतला में रैली निकाली और मंत्री के इस्तीफ़े की मांग की.

सिलचर, असम में सांसद और कांग्रेस नेता सुष्मिता देव ने ट्विटर पर लिखा "भाजपा से बेटी बचाओ."

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने मांग की है "इस मामले में खुद प्रधानमंत्री मोदी प्रत्यक्षदर्शी हैं और उन्हें ये सुनिश्चित करना चाहिए कि मंत्री को तुरंत पार्टी से बर्खास्त किया जाए और उन पर मुकदमा चलाया जाए."

अख़बार द नॉर्थईस्ट टुडे के अनुसार मनोज कांति देब ने इसे अपने ख़िलाफ़ प्रोपोगांडा बताया है.

उनका कहना है कि "कार्यक्रम के दौरान वो मेरे आगे आ गई थीं. अगर मैंने उन्हें ग़लती से छू भी लिया तो इसके पीछे कोई ग़लत मंशा नहीं थी. मैं केवल उन्हें अपने आगे से हटाने की कोशिश कर रहा था."

हालांकि बाद में त्रिपुरा भाजपा के मीडिया प्रभारी विक्टर शोम ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को दिए एक साक्षात्कार में इस वीडियो को फर्जी बताया और कहा कि "ये हमारे मंत्री को बदनाम करने की कोशिश है."

उन्होंने कहा, "असल वीडियो में नेता मंच के एक कोने में दिखाई दे रहे हैं और प्रधानमंत्री के लिए रास्ता बना रहे हैं. जो कुछ हुआ वो अनजाने में हुआ."

स्थानीय अख़बारों के अनुसार मंगलवार को सांतना चकमा ने एक बयान में कहा है कि सार्वजनिक तौर पर उनका अपमान करने के लिए वो कम्युनिस्ट पार्टी के ख़िलाफ़ कानून का दरवाज़ा खटखटा सकती हैं.

उन्होंने कहा कि "कम्युनिस्ट पार्टी के कुछ सदस्यों ने फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर फैलाया है कि मंत्री मेरी कमर रक हाथ रख रहे हैं. लेकिन मैं बता दूं कि इसमें ग़लत तरीके के छूने जैसा कुछ भी नहीं है."

अब तक इस मामले में भाजपा के किसी बड़े नेता या प्रधानमंत्री का बयान नहीं आया है.

Tuesday, February 5, 2019

क्या सऊदी अरब से चीन को क़ाबू में करेगा पाकिस्तान

चीन और पाकिस्तान की महत्वाकांक्षी परियोजना चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर यानी सीपीईसी की जब शुरुआत हुई थी तो इसे पूरी तरह से द्विपक्षीय रखने की बात कही गई थी.

इसमें कई बार दूसरे देशों को आमंत्रित भी किया गया तो इस बात को लेकर दृढ़ता रही कि परियोजना पर नियंत्रण चीन और पाकिस्तान का ही रहेगा.

सीपीईसी के अनुबंधों के अनुसार चीन और पाकिस्तान के अलावा दूसरे देश इससे जुड़ी परियोजनाओं में शामिल हो सकते हैं लेकिन नीति-निर्माण और इसे लागू करने के फ़ैसलों में किसी तीसरे देश का दख़ल नहीं होगा.

अतीत में पाकिस्तान ईरान को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दे चुका है. ऐसे में सऊदी अरब को इसमें शामिल होने के लिए बुलाना कोई नई बात नहीं है.

कहा जा रहा है कि सऊदी पाकिस्तान में बलूचिस्तान प्रांत के ग्वादर पोर्ट में एक अहम साझेदार बन लंबी अवधि की रणनीति पर काम करने का विचार कर रहा है.

कई विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी ऐसा कर अपनी विदेश नीति में प्रयोग करने के मूड में है.

ज़ाहिर है सीपीईसी में सऊदी और यूएई की एंट्री होती है तो परियोजना के ढांचा में परिवर्तन होगा. सभी देशों के अपने भूराजनैतिक उद्देश्य और हित हैं.

इस परियोजना से चीन की ऊर्जा सुरक्षा जुड़ी हुई है. चीन को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के एक चौथाई ऊर्जा की ज़रूरत है और इसके लिए पेट्रोलियम संपन्न देश काफ़ी अहम हैं.

इस योजना में मध्य-पूर्व से प्रस्तावित तेल पाइपलाइन से चीन का बड़ा हित जुड़ा हुआ है लेकिन इसकी जटिलता का अंदाज़ा सबको है. ईरान और खाड़ी के देशों के विवाद की उपेक्षा इस मामले में नहीं की जा सकती है.

चीन के सऊदी अरब और यूएई से भी बहुत अच्छे संबंध हैं. अगर इसमें सऊदी और यूएई की एंट्री होती है तो चीन के प्रभाव कम होने की बात कही जा रही है. सीपीईसी में ज़्यादा देश शामिल होंगे तो चीन के एकाधिकार पर असर पड़ना लाज़िमी है.

इसमें चीन के लिए तीसरी दिक़्क़त ये है कि अमरीका से सऊदी और यूएई के बीच बहुत अच्छे रिश्ते हैं जबकि चीन को अमरीका अपना सबसे कट्टर प्रतिद्वंद्वी मानता है.

वॉशिंगटन स्थित जियोस्ट्रैटिजिक कंस्लटेंसी गल्फ़ स्टेट एनलिटिक्स के थियोडोर कारसिक ने द डिप्लोमैट से कहा है, ''सऊदी का पाकिस्तान में निवेश दोनों देशों के अच्छे होते संबंधों का परिचायक है. सऊदी आतंक विरोधी इस्लामिक सैन्य बल भी बनाने की आकांक्षा रखता है.''

सीपीईसी में नई प्रगति को लेकर इसके एक सकारात्मक पहलू की भी चर्चा हो रही है. ग्वादर अब कई देशों के लिए कारोबार का केंद्र बनने जा रहा है और यह उस अफ़वाह के उलट है कि ग्वादर में चीन सैन्य ठिकाना बनाने जा रहा है.

पाकिस्तान में सीपीईसी को लेकर कई तरह के विवाद बढ़ रहे थे और इसमें चीन की नकारात्मक छवि बन रही थी. ऐसे में सऊदी और यूएई के आने से पाकिस्तान के लिए अच्छा साबित हो सकता है.

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के बारे में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने लिखा है, ''इमरान ख़ान चाहते हैं कि चीन सीपीईसी में सऊदी अरब को भी उतना ही विश्वसनीय साथी बनाए जितना पाकिस्तान है. ख़ान सऊदी और यूएई को इस परियोजना में शामिल कर चीन के प्रभाव को संतुलित करना चाहते हैं.''

पाकिस्तान के साथ समस्या ये है कि वो सऊदी के साथ ईरान को नाराज़ कर नहीं जाना चाहता है और दोनों को एक साथ साधना भी आसान नहीं है.

पाकिस्तान लंबे समय से कोशिश कर रहा है कि वो ईरान और सऊदी अरब के बीच संतुलन बनाकर चले, लेकिन संतुलन की नीति हमेशा मुश्किल होती है.

पाकिस्तान के बारे में कहा जाता है कि अगर राजनीतिक और सामाजिक रूप से सबसे ज़्यादा किसी भी देश का प्रभाव है तो वो है सऊदी अरब.

सऊदी में पाकिस्तान के क़रीब 27 लाख लोग काम करते हैं. ये पाकिस्तानी कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री और छोटी-मोटी नौकरियों में हैं. ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान सऊदी के क़रीब रहा है और इसे अमरीका, ब्रिटेन ने बढ़ावा दिया है.

पाकिस्तान को भी इस बात का अहसास है कि उसे सऊदी से सबसे ज़्यादा आर्थिक मदद मिलती है. यहां तक कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार प्रोजेक्ट में भी सऊदी ने निवेश किया है.

पाकिस्तान मीडिया में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान की संभावित यात्रा को लेकर काफ़ी अटकलबाजी है.

अख़बारों में अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि क्राउन प्रिंस कितनी बड़ी रक़म के निवेश की घोषणा करेंगे. कहा जा रहा है कि प्रिंस सलमान इस महीने ही पाकिस्तान पहुंचने वाले हैं.

डॉन समेत कई अहम अख़बारों का कहना है कि सऊदी अरब पाकिस्तान के साथ 10 अरब डॉलर के एमओयू पर हस्ताक्षर कर सकता है.

Sunday, February 3, 2019

क्या 'सूअर वाले नए साल' से आहत होंगे चीन, मलेशिया और इंडोनेशिया के मुसलमान?

विश्व में विभिन्न समुदाय लूनर न्यू ईयर (चंद्र नव वर्ष) का जश्न मनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. यह इस बार और भी ख़ास है क्योंकि चीनी ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष का पशु सूअर है.

लूनर न्यू ईयर के जश्न का मतलब होता है कि उस वर्ष का पशु आपको हर कहीं दिखेगा. यह सजावट से लेकर खिलौनों, तोहफ़ों और विज्ञापनों तक में नज़र आता है.

लेकिन इस वर्ष का पशु सूअर के होने से एक नई बहस शुरू हो गई है. चीनी ज्योतिष कैलेंडर में अंतिम पशु सूअर होता है लेकिन मुसलमानों के लिए इसको खाना निषेध है और इसे अपवित्र समझा जाता है.

तो क्या दक्षिण पूर्वी एशिया के मुस्लिम बहुल देशों में लूनर नव वर्ष मनाने वालों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई है?

बहुत सी चीनी-मलेशिया परिवारों की तरह ही चाऊ परिवार के लिए लूनर नव वर्ष एक अच्छे व्यापार का मौक़ा होता है. वह मलेशिया में जोहोर के बातू पहाट शहर में रहते हैं.


चाऊ यून की के लिए यह साल बेहद ख़ास है क्योंकि उनकी पत्नी स्टेला और उनकी बेटी का सूअर वाले वर्ष में ही जन्म हुआ है.

एक स्थानीय बिस्किट फ़ैक्ट्री में फ़्लोर मैनेजर चाऊ कहते हैं, "हम घर को सूअर के शुभ आभूषणों से सजाएंगे और हमारे रिश्तेदार, दोस्त, पड़ोसी हमारे घर आएंगे चाहे वे किसी भी नस्ल या धर्म के क्यों न हों. जश्न सभी के लिए है."

वह इस बात को लेकर चिंतित नहीं हैं कि उनके जश्न से उनके साथियों को बुरा लगेगा. उनका मानना है कि नए साल पर कोई विवाद नहीं है.

वह याद करते हुए कहते हैं कि पिछले साल के नव वर्ष का पशु कुत्ता था जिसको लेकर भी भारी हंगामा हुआ था.

मलेशिया एक बहु-सांस्कृतिक देश है लेकिन उसका आधिकारिक धर्म इस्लाम है. साथ ही वहां से ऐसी रिपोर्टें आती रही हैं कि मुसलमानों के अपमान से जुड़ी हरकतों के कारण इस देश में असहिष्णुता बढ़ी है.

इस वजह से मुस्लिम समुदायों को नाराज़ न करने के डर से कई दुकानदारों ने कुत्तों की तस्वीर इस्तेमाल नहीं की.

लेकिन चाऊ को लगता है कि छुट्टी का जश्न मनाने वाले चीनी समुदाय को स्थानीय प्रशासन नज़रअंदाज़ करता है.

वह कहते हैं, "मलेशिया कई नस्लों के लोगों से मिलकर बना है, यहां केवल मलय मुस्लिम नहीं है. यहां पर चीनी और भारतीय समुदाय भी है. साथ ही ईसाई, हिंदू, ताओ और बौद्ध जैसे धर्म भी हैं. इसलिए हमें एक-दूसरे की भावनाओं और जश्न का सम्मान करना चाहिए."

हालांकि, वह कहते हैं कि ऐसा नहीं लगता है कि 'सेंसरशिप की भावना' इस सूअर वाले वर्ष में भी जारी रहेगी.

चीनी ज्योतिष के अनुसार हर पशु की अपनी ख़ास विशेषता और लक्षण होते हैं. सूअर वाले वर्ष में जन्म लेने वाले को बुद्धिमान, दयालु और वफ़ादार कहा जाता है.

क्या इस ज्योतिष के किसी पशु का स्वागत नहीं करने कोई फ़र्क़ पड़ता है?

इस सवाल पर क्वालालंपुर में चीनी ज्योतिष के विशेषज्ञ जोय याप कहते हैं, "इसको लेकर चिंता की कोई बात ही नहीं है."

उन्होंने बीबीसी से कहा कि पिछले साल की तुलना में देखें तो इस साल मलेशिया में नए साल के जश्न पर कोई संवेदनशीलता देखने को नहीं मिल रही है.

वह कहते हैं कि इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप किसी वस्तु का प्रदर्शन कर रहे हैं या नहीं क्योंकि किसी की किस्मत पर इसका कोई असर नहीं होता.

वह कहते हैं, "रंग, प्रतीक...ये सभी महत्वपूर्ण नहीं हैं. वास्तव में कर्मों से भाग्य चमकता है, इसलिए सकारात्मक रहना चाहिए."

'इन सूअरों को मुस्लिम खा सकते हैं'

विश्व में सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में लूनर न्यू ईयर पर राष्ट्रीय अवकाश होता है. इस दौरान सार्वजनिक रूप से कई शहरों में जश्न मनाया जाता है जिसमें रोशनी की जाती है, रंग-बिरंगी झांकियां निकलती हैं और विभिन्न प्रस्तुतियां होती हैं.

जकार्ता की मेरी ओलिविया कहती हैं कि उनके मुस्लिम दोस्तों ने सूअर की तस्वीरों का स्वागत किया है.

वह कहती हैं, "मैं बहुत से इंडोनेशिया मुसलमानों के बीच में पली-बढ़ी हूं तो मैं जानती हूं कि सूअर उन्हें चिंतित नहीं करता है."

वह कहती हैं कि यह पशु बाकी किसी दूसरे अन्य पशुओं से अधिक 'प्रसन्न' दिखता है.

उनका कहना है, "अगर आप सूअर की सांप से तुलना करें तो सूअर बहुत प्यारे लगते हैं इसलिए लोग सजावट का सामान ख़रीदते हैं और उससे घर सजाते हैं."

बेकरी का काम करने वाली वलेरिया रीटा नए साल के लिए ख़ास मिठाइयां बना रही हैं जिनमें सुअर जैसे दिखने वाले बिस्किट हैं.

वह कहती हैं कि उन्हें अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. वह कहती हैं, "संतरा लूनर न्यू ईयर का प्रसिद्ध प्रतीक है. इस साल हमने सूअर के आकार की मिठाइयां बनाने का फ़ैसला लिया और प्री-ऑर्डर का कोटा दो हफ़्तों में ही पूरा हो गया."

उनके बहुत से ग्राहक मुसलमान भी हैं.

वह कहती हैं, "वे इसका जश्न मनाने वाले अपने चीनी सहकर्मियों और दोस्तों के लिए मेरे बिस्किट ख़रीदते हैं. कइयों ने अपने लिए भी ऑर्डर दिया क्योंकि उन्हें सूअर पसंद हैं.

उन्होंने अपने एक मुस्लिम दोस्त द्वारा भेजे एक संदेश को साझा किया. इसमें लिखा था कि "मेरी ये मिठाइयां ऐसे पहले सूअर हैं जन्हें मुसलमानों को खाने की अनुमति है."

Friday, February 1, 2019

बेंगलुरु में ट्रेनी लड़ाकू विमान मिराज-2000 क्रैश, दो पायलटों की मौत

यहां शुक्रवार को एक ट्रेनी लड़ाकू विमान मिराज-2000 दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें 2 पायलटों की मौत हो गई। हादसा शुक्रवार सुबह बेंगलुरु के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) एयरपोर्ट पर हुआ। प्लेन में दो ही पायलट सवार थे। हादसे के वक्त दोनों प्लेन से बाहर निकल गए थे। एक पायलट की मौत प्लेन के मलबे पर गिरने से हो गई, जबकि दूसरे ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने कहा, जांच के आदेश दे दिए गए हैं। फिलहाल हादसे के सही कारणों का पता नहीं चल सका है। मृतक पायलटों की पहचान समीर एब्रोल और सिध्दार्थ नेगी के रूप में की गई। दोनों विमान और सिस्टम परीक्षण संस्थान में स्कॉर्डन लीडर थे।

एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश
28 जनवरी 2019 को उत्तरप्रदेश के कुशीनगर के खेतिमपुर में एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश हुआ था। हादसे के बाद प्लेन में आग लग गई थी। हालांकि, विमान के पायलट ने पैराशूट के जरिए अपनी जान बचा ली थी। ये सुपर सोनिक विमान जगुआर फ्रांस में बना था, जो कम ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम है और दूर तक मार कर सकता है।

गुजरात में भी हुआ था हादसा
गुजरात के कच्छ में पिछले साल 5 जून को भारतीय वायुसेना का जगुआर एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में एयर कमोडोर रैंक के अफसर संजय चौहान शहीद हो गए थे। बताया गया था कि एयरक्राफ्ट ने रुटीन ट्रेनिंग के लिए जामनगर से उड़ान भरी थी।

एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश
28 जनवरी 2019 को उत्तरप्रदेश के कुशीनगर के खेतिमपुर में एयरफोर्स का जगुआर प्लेन क्रैश हुआ था। हादसे के बाद प्लेन में आग लग गई थी। हालांकि, विमान के पायलट ने पैराशूट के जरिए अपनी जान बचा ली थी। ये सुपर सोनिक विमान जगुआर फ्रांस में बना था, जो कम ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम है और दूर तक मार कर सकता है।

गुजरात में भी हुआ था हादसा
गुजरात के कच्छ में पिछले साल 5 जून को भारतीय वायुसेना का जगुआर एयरक्राफ्ट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में एयर कमोडोर रैंक के अफसर संजय चौहान शहीद हो गए थे। बताया गया था कि एयरक्राफ्ट ने रुटीन ट्रेनिंग के लिए जामनगर से उड़ान भरी थी।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले केंद्र की मोदी सरकार ने अपना अंतरिम बजट पेश किया. कार्यवाहक वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने जब सुबह 11 बजे अपना बजट भाषण पढ़ना शुरू किया, तो उनके पिटारे से हर किसी के लिए तोहफे निकले. किसान, महिला, टैक्स पेयर, युवा, मजदूर पीयूष गोयल ने हर किसी की झोली भर दी. शुरू में तो टैक्स पेयर के लिए कोई ऐलान नहीं किया गया था, लेकिन भाषण के अंत में पीयूष गोयल ने जैसे ही ऐलान किया कि अब 5 लाख रुपये तक सालाना कमाने वाले टैक्सपेयर को कोई टैक्स नहीं देना होगा तो मिडिल क्लास की खुशी का ठिकाना नहीं रहा.

मोदी सरकार के इस अंतरिम बजट को चुनावी सौगातों की बौछार के तौर पर भी देखा जा रहा है. कांग्रेस शासित प्रदेश में जिस तरह कर्जमाफी की गई उस लिहाज से मोदी सरकार ने किसानों की जेब में सीधा कैश पहुंचाने का ऐलान किया. इस बजट में किसके लिए क्या खास है, यहां पढ़ें...