Wednesday, January 23, 2019

दुनिया के 'पहले फ़्यूज़न फ़ूड' के बारे में कितना जानते हैं आप

मकाऊ की पुरानी बस्ती की एक गली में अनजान सा एक रेस्त्रां है.

ये मकाऊ की पहचान बन चुकी चमक-दमक भरी सड़कों, बड़े-बड़े साइनबोर्ड वाले कैसिनो की दुनिया से बिल्कुल ही अलग जगह है.

मकाऊ, चीन के दक्षिणी तट के क़रीब एक छोटा सा शहर है. कभी ये पुर्तगाल का उपनिवेश हुआ करता था. बाद में पुर्तगाल ने इसे चीन को वापस कर दिया.

चीन ने मकाऊ को स्वायत्त रूप से शासन का अधिकार दिया हुआ है.

मकाऊ की तंग गली में स्थित जिस रेस्त्रां की हम बात कर रहे हैं, वो यहां के इतिहास और संस्कृति की जीती-जागती मिसाल है.

रेस्त्रां चलाने वाली सोनिया पामर कहती हैं, "मैं शर्त लगा सकती हूं कि मकाऊ का खान-पान दुनिया में फ्यूज़न फूड का सबसे पहला नमूना था."

फ़्यूज़न फ़ूड यानी अलग-अलग संस्कृति के पकवानों से बनाए जाने वाले नए किस्म का पकवान.

पास ही उनकी 103 बरस की मां आइडा डे जीसस बैठी हैं. इस रेस्तरां का नाम है रिक्वेक्सो. मां-बेटी मिलकर ये रेस्त्रां पिछले 35 सालों से चला रही हैं.

यहां पर मकाऊ के ओरिजिनल व्यंजन परोसे जाते हैं. ये व्यंजन पुर्तगाली और चीनी खान-पान के मेल से तैयार किए गए हैं. स्वाद की ये विरासत क़रीब 450 साल पुरानी है.

इसकी शुरुआत सोलहवीं सदी में उस वक़्त हुई थी, जब पुर्तगाल ने इस द्वीप को कारोबारी ठिकाना बनाने के लिए ठेके पर लिया था.

मकाऊ के खाने को यूनेस्को ने दुनिया के पहले 'फ्यूज़न फूड' का दर्ज़ा दिया है.

सोनिया पामर बताती हैं, "मकाऊ का खान-पान मकाऊ के बाशिंदों की तरह ही पुर्तगाली और चीनी संस्कृति के मेल से पैदा हुआ."

"जब चीन की महिलाओं ने पुर्तगालियों से शादी की, तो वो अपने खाविंदों के लिए पुर्तगाली मिज़ाज का खाना पकाने की कोशिश करती थीं."

"तब मकाऊ में तो पुर्तगाल के सभी व्यंजनों को तैयार करने की सामग्री उपलब्ध नहीं थी."

"इसलिए चीनी मूल की महिलाओं ने अपने स्थानीय मसालों और सब्जियों की मदद से पुर्तगाली खाना तैयार करना शुरू किया."

"इस तरह से दुनिया के पहले फ्यूज़न फूड की शुरुआत हुई."

सोनिया कहती हैं कि उनकी मां को मकाऊ के व्यंजनों की गॉड मदर कहा जाता है.

सोनिया बताती हैं, "जब मेरी मां ने रिक्वेक्सो रेस्त्रां की शुरुआत की थी, तो ये मकाऊ के व्यंजन परोसने वाला पहला ठिकाना था."

"इससे पहले मकाऊ के व्यंजन लोगों के घरों में ही पकाए जाते थे."

रेस्त्रां की दीवारों पर गुज़रे दौर की तस्वीरें लगी हैं. ये पारिवारिक रेस्त्रां लोगों को पुरानी यादों की दुनिया में ले जाता है.

यहां आने वाले क़सम खाकर ये कहते हैं कि मकाऊ का असली स्वाद यहीं मिलता है और यहां परोसी जाने वाली व्यंजनों की क़ीमत भी वाजिब है.

पुर्तगाली, मकाऊवासी और चीनी समुदाय के लोग अक्सर सोनिया के रेस्त्रां में आते हैं. कई लोग तो ऐसे हैं जो यहां रोज़ाना खाने आते हैं.

कभी-कभार बाहर से आने वाले सैलानी भी सोनिया के रेस्त्रां में परोसे जाने वाले फ्यूज़न फूड का लुत्फ़ लेने आ जाते हैं. हालांकि विदेशी सैलानी यहां कम ही आते हैं.

क्योंकि, सोनिया का रेस्तरां पुरानी बस्ती की एक गली में है. कुछ सैलानियों ने इंटरनेट की मदद से रिक्वेक्सो का पता लगाया और यहां खाने आए.

रिक्वेक्सो केवल मकाऊ के खान-पान की विरासत को नहीं संजो रहा, बल्कि वो तेज़ी से गुम हो रही मकाऊ की फ्यूज़न संस्कृति को भी बचाने में जुटा है.

जब 1999 में पुर्तगाल ने मकाऊ का शासन चीन को सौंप दिया था तब बहुत से लोग यहां से चले गए थे. इस वक़्त मकाऊ की आबादी 6 लाख 63 हज़ार 400 है.

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