中新网5月24日电 综合报道,英国脱欧至今悬而未决,首相特雷莎•梅21日提出的新脱欧草案令内阁不满,党内要求特雷莎•梅辞职的呼声越来越高。《泰晤士报》报道,特雷莎•梅24日会与“1922委员会”主席布雷迪讨论去留,她最快可能在会后宣布辞职。
英国保守党内爆发不满特雷莎•梅的声音,纷纷要求负责遴选党魁的“1922委员会”出手,修改禁止于12个月内二度逼宫的党章条文。《泰晤士报》报道,特雷莎•梅24日会与“1922委员会”主席布雷迪讨论去留,她最快可能在会后宣布辞职,但如果双方谈判破裂,委员会或会公布早前举行的修改党章不记名投票结果,为再次逼宫做准备。
英国首相发言人23日回应下台传闻时,重申特雷莎•梅仍然打算落实脱欧,并强调她会继续以首相身份,迎接6月3日访英的美国总统特朗普。
但与此同时,英国当局却宣布延后向议会提交新脱欧方案,由原定的23日延期至6月初,二次辩论时间更会延至6月7日或以后。
“1922委员会”财务主管布朗23日表示,首相府否认特雷莎•梅辞职可能只是“烟幕”,目的是不想影响欧洲议会选举投票,推测特雷莎•梅仍有机会在24日辞职。
强硬脱欧派上台将可能“极速脱欧”
如果特雷莎•梅宣布辞职,保守党将马上遴选新党魁,先由该党国会议员选出两名候选人进入决选,再交英国全国12.5万名党内成员投票,整个过程需要4至6个星期,其间特雷莎•梅会留任首相。
有分析推测,一旦前外交大臣约翰逊等强硬脱欧派成功上台,新首相可能会直接绕过脱欧协议,宣布英国以最快速度脱欧。
特雷莎•梅近日表示,已修改此前被议会三次否决的脱欧协议草案,在英国与欧盟临时关税同盟、爱尔兰边界问题所涉及的“备份安排”及保护英国劳工权益等方面增加了新的保障内容。
特雷莎•梅说,这是确保英国脱欧的最后机会。英国原定今年3月29日正式脱欧,但由于脱欧协议连遭议会否决,脱欧进程陷入停滞。目前,英国脱欧期限已延长至10月31日。
Friday, May 24, 2019
Friday, May 17, 2019
中巴经济走廊副产品:被拐卖到中国的巴基斯坦新娘的故事
一名中国男子和一名巴基斯坦女子在巴基斯坦东部城市费萨拉巴德(Faisalabad)结婚,这一切看上去十分正常,但一个月之后,这个美好的故事却遇上悲剧般的改变,她的父母最终要把她从人口贩子救回来。
表面看来,两人看起来似乎十分般配:他们都是基督徒,男方21岁,是一位商人,女方19岁,是一名受过训练的美容师。
婚礼遵照巴基斯坦习俗进行,先是男方向女方求婚,婚礼举行了称为“曼海蒂”(Mehndi,又称Henna)的彩绘纹身仪式,还举行传统巡游,让这对新婚夫妇在女方的家交换婚誓。这些令女方的家人十分高兴,因为他们认为这显示男方十分尊重当地习俗,男方家人还愿意为婚礼买单,但这一切都只是晃子。
BBC乌尔都语记者巴洛科(Saher Baloch)报道,这个女子其实是人口贩卖团伙的一名受害者。随着中国和巴基斯坦经济关系日渐密切,越来越多中国男子娶巴基斯坦女子为妻子,但同时也为犯罪团伙也从中发现了有利可图的商机,把巴基斯坦女子卖到中国从事性交易。
故事的主角化名“苏菲”,她说跟那名中国男子结婚前,被婚姻介绍人要求做身体检查,这令她感到很不舒服。完成检查后,介绍人就要求他们立即结婚。
“我的家人认为这样太草率,但他(介绍人)说男友会负责所有结婚的开支。” 她的家人最终同意对方的要求。
一个星期后,她被送到巴基斯坦第二大城市拉合尔(Lahore)的一所房子,那里住了许多跟她一样也是刚刚结婚的夫妇,正在等候当局处理他们的旅游证件。住在房子里的巴基斯坦女子大都利用这段时间学习中文。
就是住在这所房子里的期间,苏菲发现自己的丈夫不是基督徒,也对自己没多少感情。两人因为语言隔膜,几乎完全无法沟通,但丈夫却频繁要求同房。苏菲之后跟一名与中国男人结婚后移民到中国的朋友联络,对方告诉她到中国后,丈夫经常强迫她与丈夫的朋友发生性关系。就在这个时候,苏菲决定离开。
苏菲向婚姻介绍人透露她那位朋友的情况,对方十分恼怒,跟苏菲说她的父母要退还为她举行婚礼的钱,还要向当地一名负责介绍双方认识并在后来主持婚礼的牧师支付费用。苏菲的父母拒绝付钱,还亲身到拉合尔把苏菲救出来,她最后脱离险境。
巴基斯坦为吸引更多中国投资,向持中国护照的游客提供落地签证,但这同时为中国男子到当地寻找新娘提供了便利。中国近年通过“一带一路”下的中巴经济走廊计划,在当地投资数十亿美元建设港口、道路、铁路和能源项目,伴随资金而来的,是上万名中国人。
中国多年奉行“一孩政策”,加上中国传统家庭观念偏好男孩,令中国社会男子比女子多。中国男子到越南、缅甸和柬埔寨等东南亚国家寻找新娘已经不是新鲜事,而随着中国人到巴基斯坦越来越方便,到当地寻找新娘似乎成为最新的趋势。
巴基斯坦联邦调查局(Federal Investigation Agency,简称FIA)的调查和BBC与维权人士和受害者的访问都显示,一些巴基斯坦的神职人员似乎有参加这些贩卖女人到中国的行为。他们负责在巴基斯坦找一些合适的女子,同时欺骗这些女子,向她们保证男方的宗教背景适合与她们结婚。
维权人士伊克巴尔(Saleem Iqbal)多年来都在追踪苏菲这种婚姻的个案。他表示,过去一年以来,巴基斯坦最少大概有700名女子与中国男人结婚,这些女子大多都是基督徒。这些女子的最终命运大多不详,但人权观察(Human Rights Watch)称,她们“面临性奴役风险”。
巴基斯坦联邦调查局接受BBC查询时指出,一些中国犯罪团伙以婚姻之名,把巴基斯坦女子贩卖到中国从事性行业。FIA透露其中一个案,一些团伙成员声称他们是在当地兴建电力设施的工程师,但实际上以给当地女子安排婚礼为名,把她们卖到中国,从每名女人身上收取12,000至15,000美元。
中国回应相关报道时否认有巴基斯坦女人被卖到中国,批评“个别媒体捏造事实、以讹传讹”。但是中国政府同时承认,今年已经收到140份巴基斯坦新娘到中国的签证申请,相等于2018年全年的总数。巴基斯坦引述中国驻巴使馆参赞赵立坚说,数量突然增加引起有关官员的警觉,中方已经拒绝当中最少90宗申请。
受害人至今大多是当地的基督徒女子。她们大多来自穷困、偏远的地区。但BBC的调查发现,受害人当中也有穆斯林女子。
一名来自拉合尔的穆斯林女子向BBC透露,她三月随她的中国丈夫到中国,但抵达后经常被对方殴打,因为她拒绝与丈夫那些“烂醉的客人”上床。
这名化名梅娜的女子说,她的家人很虔诚,所以同意这桩“婚事”,因为男方是当地一所神学院的神职人员介绍来的。“但我到了中国后,发现我的丈夫不是穆斯林,他没有任何宗教信仰,我祷告的时候他会嘲笑我。”
她拒绝按“丈夫”的指示与其他人上床后就被打,被威胁。“他说他花钱把我买回来,因此我必须按他的意思行事,别无选择。如果我拒绝,他就会把我杀掉,把我的器官卖掉,赚回自己的钱。”
梅娜的家人之后向巴基斯坦当局要求协助,在巴基斯坦政府的要求下,中国当局最后把梅娜救出。
巴基斯坦联邦调查局高级官员马约(Jameel Ahmed Mayo)接受BBC访问时指出,如果犯罪团伙认为这些卖到中国的巴基斯坦女人被认为对性交易“不够好”,她们面临器官被摘取的风险。
但FIA没有提供相关证据,中国驻巴基斯坦大使馆也否认相关报道。大使馆在网站发表声明指出:“经中国公安部门调查,未发现巴籍妇女嫁到中国后存在被迫卖淫或强摘器官等情况。中国驻巴使馆此前已就有关传闻作出澄清。”
声明强调中国与巴基斯坦当局的联合调查正在进行。声明还说,“如有组织或个人打着跨国婚介旗号在巴基斯坦实施违法犯罪,中方支持巴方依法予以打击。中国公安部已派工作组来巴,同巴方开展执法合作。中方将与巴基斯坦执法部门进一步加强合作,切实打击犯罪,保障两国人民合法权益,共同维护中巴友好关系。”
表面看来,两人看起来似乎十分般配:他们都是基督徒,男方21岁,是一位商人,女方19岁,是一名受过训练的美容师。
婚礼遵照巴基斯坦习俗进行,先是男方向女方求婚,婚礼举行了称为“曼海蒂”(Mehndi,又称Henna)的彩绘纹身仪式,还举行传统巡游,让这对新婚夫妇在女方的家交换婚誓。这些令女方的家人十分高兴,因为他们认为这显示男方十分尊重当地习俗,男方家人还愿意为婚礼买单,但这一切都只是晃子。
BBC乌尔都语记者巴洛科(Saher Baloch)报道,这个女子其实是人口贩卖团伙的一名受害者。随着中国和巴基斯坦经济关系日渐密切,越来越多中国男子娶巴基斯坦女子为妻子,但同时也为犯罪团伙也从中发现了有利可图的商机,把巴基斯坦女子卖到中国从事性交易。
故事的主角化名“苏菲”,她说跟那名中国男子结婚前,被婚姻介绍人要求做身体检查,这令她感到很不舒服。完成检查后,介绍人就要求他们立即结婚。
“我的家人认为这样太草率,但他(介绍人)说男友会负责所有结婚的开支。” 她的家人最终同意对方的要求。
一个星期后,她被送到巴基斯坦第二大城市拉合尔(Lahore)的一所房子,那里住了许多跟她一样也是刚刚结婚的夫妇,正在等候当局处理他们的旅游证件。住在房子里的巴基斯坦女子大都利用这段时间学习中文。
就是住在这所房子里的期间,苏菲发现自己的丈夫不是基督徒,也对自己没多少感情。两人因为语言隔膜,几乎完全无法沟通,但丈夫却频繁要求同房。苏菲之后跟一名与中国男人结婚后移民到中国的朋友联络,对方告诉她到中国后,丈夫经常强迫她与丈夫的朋友发生性关系。就在这个时候,苏菲决定离开。
苏菲向婚姻介绍人透露她那位朋友的情况,对方十分恼怒,跟苏菲说她的父母要退还为她举行婚礼的钱,还要向当地一名负责介绍双方认识并在后来主持婚礼的牧师支付费用。苏菲的父母拒绝付钱,还亲身到拉合尔把苏菲救出来,她最后脱离险境。
巴基斯坦为吸引更多中国投资,向持中国护照的游客提供落地签证,但这同时为中国男子到当地寻找新娘提供了便利。中国近年通过“一带一路”下的中巴经济走廊计划,在当地投资数十亿美元建设港口、道路、铁路和能源项目,伴随资金而来的,是上万名中国人。
中国多年奉行“一孩政策”,加上中国传统家庭观念偏好男孩,令中国社会男子比女子多。中国男子到越南、缅甸和柬埔寨等东南亚国家寻找新娘已经不是新鲜事,而随着中国人到巴基斯坦越来越方便,到当地寻找新娘似乎成为最新的趋势。
巴基斯坦联邦调查局(Federal Investigation Agency,简称FIA)的调查和BBC与维权人士和受害者的访问都显示,一些巴基斯坦的神职人员似乎有参加这些贩卖女人到中国的行为。他们负责在巴基斯坦找一些合适的女子,同时欺骗这些女子,向她们保证男方的宗教背景适合与她们结婚。
维权人士伊克巴尔(Saleem Iqbal)多年来都在追踪苏菲这种婚姻的个案。他表示,过去一年以来,巴基斯坦最少大概有700名女子与中国男人结婚,这些女子大多都是基督徒。这些女子的最终命运大多不详,但人权观察(Human Rights Watch)称,她们“面临性奴役风险”。
巴基斯坦联邦调查局接受BBC查询时指出,一些中国犯罪团伙以婚姻之名,把巴基斯坦女子贩卖到中国从事性行业。FIA透露其中一个案,一些团伙成员声称他们是在当地兴建电力设施的工程师,但实际上以给当地女子安排婚礼为名,把她们卖到中国,从每名女人身上收取12,000至15,000美元。
中国回应相关报道时否认有巴基斯坦女人被卖到中国,批评“个别媒体捏造事实、以讹传讹”。但是中国政府同时承认,今年已经收到140份巴基斯坦新娘到中国的签证申请,相等于2018年全年的总数。巴基斯坦引述中国驻巴使馆参赞赵立坚说,数量突然增加引起有关官员的警觉,中方已经拒绝当中最少90宗申请。
受害人至今大多是当地的基督徒女子。她们大多来自穷困、偏远的地区。但BBC的调查发现,受害人当中也有穆斯林女子。
一名来自拉合尔的穆斯林女子向BBC透露,她三月随她的中国丈夫到中国,但抵达后经常被对方殴打,因为她拒绝与丈夫那些“烂醉的客人”上床。
这名化名梅娜的女子说,她的家人很虔诚,所以同意这桩“婚事”,因为男方是当地一所神学院的神职人员介绍来的。“但我到了中国后,发现我的丈夫不是穆斯林,他没有任何宗教信仰,我祷告的时候他会嘲笑我。”
她拒绝按“丈夫”的指示与其他人上床后就被打,被威胁。“他说他花钱把我买回来,因此我必须按他的意思行事,别无选择。如果我拒绝,他就会把我杀掉,把我的器官卖掉,赚回自己的钱。”
梅娜的家人之后向巴基斯坦当局要求协助,在巴基斯坦政府的要求下,中国当局最后把梅娜救出。
巴基斯坦联邦调查局高级官员马约(Jameel Ahmed Mayo)接受BBC访问时指出,如果犯罪团伙认为这些卖到中国的巴基斯坦女人被认为对性交易“不够好”,她们面临器官被摘取的风险。
但FIA没有提供相关证据,中国驻巴基斯坦大使馆也否认相关报道。大使馆在网站发表声明指出:“经中国公安部门调查,未发现巴籍妇女嫁到中国后存在被迫卖淫或强摘器官等情况。中国驻巴使馆此前已就有关传闻作出澄清。”
声明强调中国与巴基斯坦当局的联合调查正在进行。声明还说,“如有组织或个人打着跨国婚介旗号在巴基斯坦实施违法犯罪,中方支持巴方依法予以打击。中国公安部已派工作组来巴,同巴方开展执法合作。中方将与巴基斯坦执法部门进一步加强合作,切实打击犯罪,保障两国人民合法权益,共同维护中巴友好关系。”
Wednesday, May 8, 2019
गढ़चिरौली जैसी घटनाओं को माओवादी कैसे अंजाम दे पाते हैं
बीते एक मई को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में एक माओवादी हमले में सुरक्षा बलों के 15 जवानों और एक ड्राइवर की मौत हो गई थी.
माओवादियों ने सुरक्षा बलों के एक वाहन को बारूदी सुरंग के ज़रिए निशाना बनाया था. घटना जिले के कुरखेड़ा तालुका के पास हुई थी.
यह मानक संचालन प्रक्रियाओं (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर/एसओपी) के उल्लंघन का एक उदाहरण है, जिसे सेना विरोधी अभियानों से बचने के लिए पालन करना होता है.
यह कोई पहला मामला नहीं है जब एसओपी का उल्लंघन हुआ हो, इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं.
गढ़चिरौली की घटना में मारे गए जवान क्विक रिस्पॉन्स टीम के सदस्य थे. सीआरपीएफ जवानों की ड्यूटी चुनावों में लगने के बाद उन्हें यहां बुलाया गया था.
जिला पुलिस के अनुसार, उत्तर गढ़चिरौली में पुरदा पुलिस थाने के क्षेत्राधिकार में माओवादी गतिविधियां पिछले कुछ दिनों में बढ़ गई थीं.
छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़कर 11 अप्रैल को गढ़चिरौली में लोकसभा चुनाव के लिए हुआ मतदान शांतिपूर्ण रहा था.
यह वो समय है जब ग्रामीण आदिवासी तेंदु पत्तों को जंगलों से चुनते हैं. अब कई अधिकारियों का मानना है कि घटना के इलाक़े में तैनात सीआरपीएफ के जवान बेहतर तरीके से गश्त लगा सकते थे.
एक मई की घटना कई ऐसी पुरानी यादों को ताज़ा करती है. साल 2012 में सीआरपीएफ़ की एक टीम को ऐसे ही एक विस्फोट में उड़ा दिया गया था, जिसमें 12 लोग मारे गए थे और 28 घायल हुए थे.
यह घटना धनोरा के पास हुई थी. जवानों की टीम किराने के सामान और बर्तनों के साथ गट्टा जा रही थी, जहां आदिवासियों के बीच इनका वितरण महानिदेशक के. विजय कुमार के हाथों किया जाना था.
साल 2016 में अहेरी में कम तीव्रता वाले एक विस्फोट में एक जीप को निशाना बनाया गया था, जिसमें तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी.
एसओपी का उल्लंघन क्यों हुआ, जवानों की गश्ती के वक्त इसका पालन क्यों नहीं किया गया, कहां चूक हुई, इनका जवाब ना महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सुबोध कुमार जायसवाल दे रहे हैं और ना ही गढ़चिरौली के एसपी संजीव बल्कावडे.
मारे गए जवानों को पुरादा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के दादापुर नाम के गांव में भेजा गया था, जहां घटना वाले दिन ही 30 वाहनों को संदिग्ध माओवादियों ने जला दिया था. ये वाहन सड़क निर्माण कार्यों में लगाए गए थे.
माओवादियों को पता था कि आगजनी के बाद पुलिस की एक टीम को चार संभावित मार्गों में से एक के जरिए घटनास्थल पर भेजा जाएगा. आईईडी ब्लास्ट के बाद गोलीबारी की घटना नहीं हुई, जिससे यह पता चलता है कि इलाक़े में भारी संख्या में सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी नहीं थी.
इस तरह के संघर्ष पर कई अध्ययन किए गए हैं, जिसमें माओवादियों द्वारा विस्फोटकों के इस्तेमाल के तरीके और सुरक्षा बलों द्वारा उसे नष्ट करने के उपाय सुझाए गए हैं, फिर भी उन उपायों और मानक एसओपी का उल्लंघन समझ से परे है.
आईईडी उन जंगलों और स्थानों पर लगाए जाते हैं जहां इसका लगातार पता लगाना और नष्ट करना संभव नहीं होता है. यह मध्य भारत के जंगलों में माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियानों के समक्ष एक बड़ी चुनौती है.
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री द्वारा राज्य विधान सभा के समक्ष पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक साल 2010 से 2018 के मध्य तक सुरक्षाबलों ने 1250 से अधिक आईईडी का पता लगाया था.
पेश किए आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में यहां आईईडी विस्फोटों में 66 सुरक्षाकर्मी मारे गए और 205 घायल हुए थे.
आईईडी का इस्तेमाल आमतौर पर सड़क के किनारे विस्फोटक के रूप में किया जाता है. मध्य भारत में सुरक्षकर्मियों को निशाना बनाने के लिए माओवादियों ने बड़े पैमाने पर आईईडी का सहारा लिया है.
सुरक्षाबलों की नियमावली के मुताबिक इसे राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों, शिविरों के आसपास झाड़ियों में या फिर जमीन के नीचे लगाया जाता है.
सीआरपीएफ की आंतरिक रिपोर्ट से पता चलता है कि नक्सल अभियान में मारे गए 70 फ़ीसदी सुरक्षाकर्मी आईईडी और बारुदी सुरंगों के शिकार होते हैं.
यही कारण है कि साल 2012 में सीआरपीएफ ने पुणे में आईईडी प्रबंधन संस्थान स्थापित किया, जहां विस्फोटकों के पता लगाने, उसे बेअसर और नष्ट करने के लिए सैनिकों को प्रशिक्षित किया जाता है.
माओवादियों ने देशभर में कई हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया है. साउथ एशिया टेरेरिज्म पोर्टल (एसटीएपी) के जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक गढ़चिरौली की घटना 53वीं हिंसक घटना है, जिसे माओवादियों ने अंजाम दिया है.
साल 2019 में अब तक ऐसी हिंसक घटनाओं में कम से कम 107 लोग मारे गए हैं. पिछले पांच वर्षों (अप्रैल 2014 से अप्रैल 2019 तक) में देशभर में 942 नक्सली या माओवादी हमलों को अंजाम दिया गया है.
साल 2010 में इन घटनाओं की संख्या 2213, साल 2011 में 1760, साल 2012 में 1136 और साल 2013 में 1415 थी.
घने जंगलों वाले जनजातीय ज़िले गढ़चिरौली में पिछले दस सालों में माओवादियों का प्रभुत्व कम होता नज़र आ रहा है, ख़ासकर उत्तरी हिस्सों में. यह बात पुलिस के कब्ज़े में आए सीपीआई (माओवादी) के आंतरिक दस्तावेज़ों से पता चलती है.
एसटीएपी ने 2018 के अपने आकलन में कहा था कि पुलिस ने पिछले सालों में जिन हिस्सों में सफलता हासिल की है, उसे बरकरार रखना चाहिए और माओवादी फिर न उभरें, इसके लिए चौकस रहना चाहिए.
जिन इलाक़ों में उनका प्रभाव रहा होता है, वहां पर अगर राजनीतिक और प्रशासनिक शून्य बन जाता है तो बचे हुए गुरिल्ला लड़ाके फिर से राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से वापसी करने के लिए जाने जाते हैं.
एसटीएपी ने जो आँशिक जानकारी जुटाई है, उसके मुताबिक 2018 में माओवादी हिंसा में महाराष्ट्र में 58 जानें गईं जिनमें पांच आम नागरिक, दो सुरक्षा बल और 51 माओवादी थे.
2017 में कुल 27 मौतें हुईं जिनमें सात आम लोग, तीन सुरक्षा बलों के जवान और 15 माओदावी थे. इस साल 3 फरवरी तक माओवाद से संबंधित घटनाओं में आठ जानें गई हैं. इनमें सात आम नागरिक और एक माओवादी है.
इन मौतों पर सरसरी निगाह दौड़ाएं तो संकेत मिलते हैं कि 2018 में 2017 की तुलना में माओवादियों की मौत में 240 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि सुरक्षा बलों की मौत में 33.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
माओवादियों ने सुरक्षा बलों के एक वाहन को बारूदी सुरंग के ज़रिए निशाना बनाया था. घटना जिले के कुरखेड़ा तालुका के पास हुई थी.
यह मानक संचालन प्रक्रियाओं (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर/एसओपी) के उल्लंघन का एक उदाहरण है, जिसे सेना विरोधी अभियानों से बचने के लिए पालन करना होता है.
यह कोई पहला मामला नहीं है जब एसओपी का उल्लंघन हुआ हो, इससे पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं.
गढ़चिरौली की घटना में मारे गए जवान क्विक रिस्पॉन्स टीम के सदस्य थे. सीआरपीएफ जवानों की ड्यूटी चुनावों में लगने के बाद उन्हें यहां बुलाया गया था.
जिला पुलिस के अनुसार, उत्तर गढ़चिरौली में पुरदा पुलिस थाने के क्षेत्राधिकार में माओवादी गतिविधियां पिछले कुछ दिनों में बढ़ गई थीं.
छोटी-मोटी घटनाओं को छोड़कर 11 अप्रैल को गढ़चिरौली में लोकसभा चुनाव के लिए हुआ मतदान शांतिपूर्ण रहा था.
यह वो समय है जब ग्रामीण आदिवासी तेंदु पत्तों को जंगलों से चुनते हैं. अब कई अधिकारियों का मानना है कि घटना के इलाक़े में तैनात सीआरपीएफ के जवान बेहतर तरीके से गश्त लगा सकते थे.
एक मई की घटना कई ऐसी पुरानी यादों को ताज़ा करती है. साल 2012 में सीआरपीएफ़ की एक टीम को ऐसे ही एक विस्फोट में उड़ा दिया गया था, जिसमें 12 लोग मारे गए थे और 28 घायल हुए थे.
यह घटना धनोरा के पास हुई थी. जवानों की टीम किराने के सामान और बर्तनों के साथ गट्टा जा रही थी, जहां आदिवासियों के बीच इनका वितरण महानिदेशक के. विजय कुमार के हाथों किया जाना था.
साल 2016 में अहेरी में कम तीव्रता वाले एक विस्फोट में एक जीप को निशाना बनाया गया था, जिसमें तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गई थी.
एसओपी का उल्लंघन क्यों हुआ, जवानों की गश्ती के वक्त इसका पालन क्यों नहीं किया गया, कहां चूक हुई, इनका जवाब ना महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सुबोध कुमार जायसवाल दे रहे हैं और ना ही गढ़चिरौली के एसपी संजीव बल्कावडे.
मारे गए जवानों को पुरादा पुलिस स्टेशन क्षेत्र के दादापुर नाम के गांव में भेजा गया था, जहां घटना वाले दिन ही 30 वाहनों को संदिग्ध माओवादियों ने जला दिया था. ये वाहन सड़क निर्माण कार्यों में लगाए गए थे.
माओवादियों को पता था कि आगजनी के बाद पुलिस की एक टीम को चार संभावित मार्गों में से एक के जरिए घटनास्थल पर भेजा जाएगा. आईईडी ब्लास्ट के बाद गोलीबारी की घटना नहीं हुई, जिससे यह पता चलता है कि इलाक़े में भारी संख्या में सशस्त्र माओवादियों की मौजूदगी नहीं थी.
इस तरह के संघर्ष पर कई अध्ययन किए गए हैं, जिसमें माओवादियों द्वारा विस्फोटकों के इस्तेमाल के तरीके और सुरक्षा बलों द्वारा उसे नष्ट करने के उपाय सुझाए गए हैं, फिर भी उन उपायों और मानक एसओपी का उल्लंघन समझ से परे है.
आईईडी उन जंगलों और स्थानों पर लगाए जाते हैं जहां इसका लगातार पता लगाना और नष्ट करना संभव नहीं होता है. यह मध्य भारत के जंगलों में माओवादियों के ख़िलाफ़ अभियानों के समक्ष एक बड़ी चुनौती है.
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री द्वारा राज्य विधान सभा के समक्ष पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक साल 2010 से 2018 के मध्य तक सुरक्षाबलों ने 1250 से अधिक आईईडी का पता लगाया था.
पेश किए आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में यहां आईईडी विस्फोटों में 66 सुरक्षाकर्मी मारे गए और 205 घायल हुए थे.
आईईडी का इस्तेमाल आमतौर पर सड़क के किनारे विस्फोटक के रूप में किया जाता है. मध्य भारत में सुरक्षकर्मियों को निशाना बनाने के लिए माओवादियों ने बड़े पैमाने पर आईईडी का सहारा लिया है.
सुरक्षाबलों की नियमावली के मुताबिक इसे राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों, शिविरों के आसपास झाड़ियों में या फिर जमीन के नीचे लगाया जाता है.
सीआरपीएफ की आंतरिक रिपोर्ट से पता चलता है कि नक्सल अभियान में मारे गए 70 फ़ीसदी सुरक्षाकर्मी आईईडी और बारुदी सुरंगों के शिकार होते हैं.
यही कारण है कि साल 2012 में सीआरपीएफ ने पुणे में आईईडी प्रबंधन संस्थान स्थापित किया, जहां विस्फोटकों के पता लगाने, उसे बेअसर और नष्ट करने के लिए सैनिकों को प्रशिक्षित किया जाता है.
माओवादियों ने देशभर में कई हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया है. साउथ एशिया टेरेरिज्म पोर्टल (एसटीएपी) के जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक गढ़चिरौली की घटना 53वीं हिंसक घटना है, जिसे माओवादियों ने अंजाम दिया है.
साल 2019 में अब तक ऐसी हिंसक घटनाओं में कम से कम 107 लोग मारे गए हैं. पिछले पांच वर्षों (अप्रैल 2014 से अप्रैल 2019 तक) में देशभर में 942 नक्सली या माओवादी हमलों को अंजाम दिया गया है.
साल 2010 में इन घटनाओं की संख्या 2213, साल 2011 में 1760, साल 2012 में 1136 और साल 2013 में 1415 थी.
घने जंगलों वाले जनजातीय ज़िले गढ़चिरौली में पिछले दस सालों में माओवादियों का प्रभुत्व कम होता नज़र आ रहा है, ख़ासकर उत्तरी हिस्सों में. यह बात पुलिस के कब्ज़े में आए सीपीआई (माओवादी) के आंतरिक दस्तावेज़ों से पता चलती है.
एसटीएपी ने 2018 के अपने आकलन में कहा था कि पुलिस ने पिछले सालों में जिन हिस्सों में सफलता हासिल की है, उसे बरकरार रखना चाहिए और माओवादी फिर न उभरें, इसके लिए चौकस रहना चाहिए.
जिन इलाक़ों में उनका प्रभाव रहा होता है, वहां पर अगर राजनीतिक और प्रशासनिक शून्य बन जाता है तो बचे हुए गुरिल्ला लड़ाके फिर से राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से वापसी करने के लिए जाने जाते हैं.
एसटीएपी ने जो आँशिक जानकारी जुटाई है, उसके मुताबिक 2018 में माओवादी हिंसा में महाराष्ट्र में 58 जानें गईं जिनमें पांच आम नागरिक, दो सुरक्षा बल और 51 माओवादी थे.
2017 में कुल 27 मौतें हुईं जिनमें सात आम लोग, तीन सुरक्षा बलों के जवान और 15 माओदावी थे. इस साल 3 फरवरी तक माओवाद से संबंधित घटनाओं में आठ जानें गई हैं. इनमें सात आम नागरिक और एक माओवादी है.
इन मौतों पर सरसरी निगाह दौड़ाएं तो संकेत मिलते हैं कि 2018 में 2017 की तुलना में माओवादियों की मौत में 240 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जबकि सुरक्षा बलों की मौत में 33.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है.
Thursday, May 2, 2019
袁伟时:“五四”百年之际的铭记与反思
1919年5月4日,中国北京13个大学和专科学校的3000学生在天安门前集会和参加会后的游行示威,“外抗强权,内除国贼”,引领了持续一个多月、覆盖中国一百多个城市的游行示威、罢课、罢工、罢市,创造了20世纪影响深远的一段辉煌历史。
第一,正义必须维护,国家独立不可侵犯。
对现代公民说来,正义——公民自由和国家独立是最高的是非标准。当时的日本入侵中国东北,抢占青岛和胶济铁路,践踏中国主权,是典型的侵略国。当年的日本青年在盲目的“忠君爱国”精神奴役下,成为军国主义者侵略别国的工具。反对他们的侵略行径就是维护正义。百年来对五四运动爱国精神赞扬之声不绝,赞扬的就是反侵略的正义精神。
火烧交通总长曹汝霖(曾经手对日借款)的住宅和痛打驻日公使章宗祥,是参加游行的少数学生犯下的罪行。行动的动机是爱国激愤。当时只有北京大学讲师梁漱溟大声疾呼:“纵然曹章罪大恶极,在罪名未成立时,他仍有他的自由。我们纵然是爱国急公的行为,也不能侵犯他,加暴行于他……绝不能说我们所作的都对,就犯法也可以使得;我们民众的举动,就犯法也可以使得。在事实上讲,试问这几年来那一件不是借着国民意思四个大字不受法律的制裁才闹到今天这个地步?”因此,他说:“我愿意学生事件付法庭办理,愿意检厅去提起公诉,学生去遵判服罪。”
不幸,梁漱溟的意见遭到绝大多数人的反对。此后,学生动辄罢课,有些学生运动暴力行动屡见不鲜,蔑视少数人的权利,沦为暴民专制的工具。据中央研究院吕芳上教授研究,从1919—1928年,138次学生罢课和上街游行事件中,发生暴力事件23件,占21.6%。他们烧报馆,抄部长的家,如此等等,罔顾法纪。
胡适、蒋梦麟等为此感到非常痛心。1920年5月4日,他们联名发表《我们对于学生的希望》,沉痛地说:“现在学生会议的会场上,对于不肯迎合群众心理的言论,往往有许多威压的表示,这是暴民专制,不是民治精神。民治主义的第一个条件,就是要使各方面的意见都可自由发表。”
不过,言者谆谆听者藐藐,学生的暴力行动由自发逐渐成为党派斗争的工具。比如1925年火烧晨报馆事件,当时一些学生认为《晨报》的报道没有准确表达他们的意见,那就是站在敌对势力一边,于是把晨报社连同附近20多间房屋烧掉。而背后操纵这一行动的是国民党北京执行部。
五四游行示威,指斥曹汝霖、章宗祥(前驻日公使)、陆宗舆(驻日公使)是卖国贼,直到6月10日,徐世昌总统下令撤除他们的官职,运动才告一段落。
不过,20世纪30年代以来,认真研究过中日关系史的学者们持平之论,都认为他们在处理中日事务中没有出卖过国家利益。检视他们一生的言行,不但不是卖国贼,而且是当之无愧的爱国人士。抗战时期,不管日寇如何威逼利诱,他们都拒绝与侵略者合作。
中华民国北京政府从1912年成立到1928年瓦解,尽管政府领导人频繁更换,但都致力于收回国家利权,根本不是什么卖国政府。他们也渴望通过巴黎和会收回青岛和胶济路,废除不平等条约,并为此做了充分准备。就以会上日本振振有词拿出来的“欣然同意”的山东问题换文来说,著名报人王芸生在1930年代系统研究档案后指出:日方提出用日本借款修筑胶济路两条支线,“中国方面乃提议将胶济沿线之日本兵撤至青岛等条件,以为交换……此项换文在当时言之,比较于中国有利。然当时欧战大势显然属于德败,我为参战国之一,关于山东问题,自以留待媾和大会为得计。乃当时中国与日本有此一幕枝节交涉,资为日本后日在巴黎和会中之借口,亦憾事矣。” 一个被日本利用的失误,显然与卖国行为不能混为一谈。此外,他们经手的西原借款条件也是优惠的。
民国北京政府被戴上卖国帽子,是国民党为自己的“革命”行动辩护蓄意制造出来的,史家应该为前人辨冤白谤。政治家和公民应该从中吸取的教训是政务一定要公开。要是当时的中央政府领导人及时披露真相,从短期看,与示威群众坦诚沟通,有可能较快化解对立,出现政府与民间联手对抗侵略者的局面。而从长远看,包括青年学生在内的多数公民会较快成熟,冷静、全面、理性看待一切,抵制极端。从晚清到民国,历届政府都没有学会如何与示威群众沟通,造成恶劣后果,创巨痛深,值得深思。
很多人容易将新文化运动和五四混为一谈,但事实上两者性质和起止时段都不同。新文化运动是19世纪以来,中外知识精英传播现代文明,推动中国社会转型而进行的思想文化运动。
1.它萌发于1833年,德国传教士郭实腊在广州创办了中国第一份现代杂志《东西洋考每月统记传》。
2.它的基本内容是传播现代文明的信念:自由(最早译为“人有自主之权”),法治,民主,市场经济,理性思维(科学)。反对中国传统文化的核心——以三纲六纪(六亲)为框架的宗法专制制度;反对拜倒在圣贤脚下,以他们的言论为是非标准。
3.它是社会变革的先导和动力。19世纪,它开始改变精英阶层的观念和知识结构。20世纪更硕果累累,推动了废除以三纲六纪为骨架的中华法系,移植以公民权利为核心的大陆法系;推动了废除以读经为中心的科举制,建立了学习现代科学、文化的教育体系;以白话文取代文言文,实现语文合一,适应工商社会快速沟通和传播的要求;移植了人文、社会科学和现代科学技术;揭露了三纲吞噬人性的本质,为公民的自由、平等铺路;击退了儒教写入宪法的诉求;推动文学革命,促进了文学、艺术全面繁荣。
第一,正义必须维护,国家独立不可侵犯。
对现代公民说来,正义——公民自由和国家独立是最高的是非标准。当时的日本入侵中国东北,抢占青岛和胶济铁路,践踏中国主权,是典型的侵略国。当年的日本青年在盲目的“忠君爱国”精神奴役下,成为军国主义者侵略别国的工具。反对他们的侵略行径就是维护正义。百年来对五四运动爱国精神赞扬之声不绝,赞扬的就是反侵略的正义精神。
火烧交通总长曹汝霖(曾经手对日借款)的住宅和痛打驻日公使章宗祥,是参加游行的少数学生犯下的罪行。行动的动机是爱国激愤。当时只有北京大学讲师梁漱溟大声疾呼:“纵然曹章罪大恶极,在罪名未成立时,他仍有他的自由。我们纵然是爱国急公的行为,也不能侵犯他,加暴行于他……绝不能说我们所作的都对,就犯法也可以使得;我们民众的举动,就犯法也可以使得。在事实上讲,试问这几年来那一件不是借着国民意思四个大字不受法律的制裁才闹到今天这个地步?”因此,他说:“我愿意学生事件付法庭办理,愿意检厅去提起公诉,学生去遵判服罪。”
不幸,梁漱溟的意见遭到绝大多数人的反对。此后,学生动辄罢课,有些学生运动暴力行动屡见不鲜,蔑视少数人的权利,沦为暴民专制的工具。据中央研究院吕芳上教授研究,从1919—1928年,138次学生罢课和上街游行事件中,发生暴力事件23件,占21.6%。他们烧报馆,抄部长的家,如此等等,罔顾法纪。
胡适、蒋梦麟等为此感到非常痛心。1920年5月4日,他们联名发表《我们对于学生的希望》,沉痛地说:“现在学生会议的会场上,对于不肯迎合群众心理的言论,往往有许多威压的表示,这是暴民专制,不是民治精神。民治主义的第一个条件,就是要使各方面的意见都可自由发表。”
不过,言者谆谆听者藐藐,学生的暴力行动由自发逐渐成为党派斗争的工具。比如1925年火烧晨报馆事件,当时一些学生认为《晨报》的报道没有准确表达他们的意见,那就是站在敌对势力一边,于是把晨报社连同附近20多间房屋烧掉。而背后操纵这一行动的是国民党北京执行部。
五四游行示威,指斥曹汝霖、章宗祥(前驻日公使)、陆宗舆(驻日公使)是卖国贼,直到6月10日,徐世昌总统下令撤除他们的官职,运动才告一段落。
不过,20世纪30年代以来,认真研究过中日关系史的学者们持平之论,都认为他们在处理中日事务中没有出卖过国家利益。检视他们一生的言行,不但不是卖国贼,而且是当之无愧的爱国人士。抗战时期,不管日寇如何威逼利诱,他们都拒绝与侵略者合作。
中华民国北京政府从1912年成立到1928年瓦解,尽管政府领导人频繁更换,但都致力于收回国家利权,根本不是什么卖国政府。他们也渴望通过巴黎和会收回青岛和胶济路,废除不平等条约,并为此做了充分准备。就以会上日本振振有词拿出来的“欣然同意”的山东问题换文来说,著名报人王芸生在1930年代系统研究档案后指出:日方提出用日本借款修筑胶济路两条支线,“中国方面乃提议将胶济沿线之日本兵撤至青岛等条件,以为交换……此项换文在当时言之,比较于中国有利。然当时欧战大势显然属于德败,我为参战国之一,关于山东问题,自以留待媾和大会为得计。乃当时中国与日本有此一幕枝节交涉,资为日本后日在巴黎和会中之借口,亦憾事矣。” 一个被日本利用的失误,显然与卖国行为不能混为一谈。此外,他们经手的西原借款条件也是优惠的。
民国北京政府被戴上卖国帽子,是国民党为自己的“革命”行动辩护蓄意制造出来的,史家应该为前人辨冤白谤。政治家和公民应该从中吸取的教训是政务一定要公开。要是当时的中央政府领导人及时披露真相,从短期看,与示威群众坦诚沟通,有可能较快化解对立,出现政府与民间联手对抗侵略者的局面。而从长远看,包括青年学生在内的多数公民会较快成熟,冷静、全面、理性看待一切,抵制极端。从晚清到民国,历届政府都没有学会如何与示威群众沟通,造成恶劣后果,创巨痛深,值得深思。
很多人容易将新文化运动和五四混为一谈,但事实上两者性质和起止时段都不同。新文化运动是19世纪以来,中外知识精英传播现代文明,推动中国社会转型而进行的思想文化运动。
1.它萌发于1833年,德国传教士郭实腊在广州创办了中国第一份现代杂志《东西洋考每月统记传》。
2.它的基本内容是传播现代文明的信念:自由(最早译为“人有自主之权”),法治,民主,市场经济,理性思维(科学)。反对中国传统文化的核心——以三纲六纪(六亲)为框架的宗法专制制度;反对拜倒在圣贤脚下,以他们的言论为是非标准。
3.它是社会变革的先导和动力。19世纪,它开始改变精英阶层的观念和知识结构。20世纪更硕果累累,推动了废除以三纲六纪为骨架的中华法系,移植以公民权利为核心的大陆法系;推动了废除以读经为中心的科举制,建立了学习现代科学、文化的教育体系;以白话文取代文言文,实现语文合一,适应工商社会快速沟通和传播的要求;移植了人文、社会科学和现代科学技术;揭露了三纲吞噬人性的本质,为公民的自由、平等铺路;击退了儒教写入宪法的诉求;推动文学革命,促进了文学、艺术全面繁荣。
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