संगीतकार पैट इरविन 1984 से न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड सिटी के निवासी हैं. वह कहते हैं, "हम हमेशा से जानते थे कि यह बदलने वाला है. लेकिन ऐसे बदलेगा, यह पता नहीं था."
न्यूयॉर्क के क्वीन्स में लॉन्ग आइलैंड सिटी को कभी बंजर औद्योगिक भूमि समझा जाता था. आज यह अमरीका का सबसे तेज़ी से उभरता हुआ मुहल्ला है.
यहां यह तेज़ी बरकरार रहने वाली है. 14 महीने की प्रतियोगिता जिसमें उत्तर अमरीका के कई शहरों ने बोलियां लगाई थीं, के बाद ऑनलाइन रीटेल कंपनी अमेज़ॉन ने अपने दो मुख्यालयों में से एक का निर्माण यहां करने का एलान किया है.
अमेज़ॉन ने अगले 15 साल में 3.6 अरब डॉलर के निवेश और 40,000 नौकरियों का वादा किया है.
बदले में न्यूयॉर्क की शहर और राज्य सरकारों ने प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन पैकेज की पेशकश की है जो 2.8 अरब डॉलर तक की हो सकती है.
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अमेज़ॉन की घोषणा ने लॉन्ग आइलैंड सिटी के पुराने बाशिंदों को भावुक कर दिया है. कई लोग उन दिनों को याद करते हैं कि जब यहां शांति होती थी. लोग कुछ ही जगहों पर रहते थे.
कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि अमेज़ॉन के निवेश से नौकरियां पैदा होंगी और बुनियादी सुविधाओं में सुधार होगा. कुछ दूसरे लोग कहते हैं कि वे नये घटनाक्रम से अचंभित हैं और यह नहीं जानते कि यहां का किराया बढ़ेगा तो वे कहां जाएंगे.
65 साल के स्थानीय निवासी जिम ढिल्लन कहते हैं, "मैं जिनको जानता हूं उनके लिए नौकरी सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है. कामकाजी वर्ग के लिए नौकरियां चाहिए. कोई भी नौकरी कुछ ना होने से बेहतर है."
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संपत्ति की क़ीमतों में उछाल
क्वीन्स में लॉन्ग आइलैंड सिटी पहले से ही सबसे महंगी जगह है.
प्रॉपर्टी वेबसाइट स्ट्रीटइज़ी के मुताबिक यहां एक औसत घर की कीमत 7,69,000 डॉलर है और औसत किराया 2450 डॉलर महीना है.
यहां दाम घटने की कोई संभावना नहीं है. अमेज़ॉन के आने की ख़बर ने यहां के प्रॉपर्टी वेबसाइट पर ट्रैफ़िक बढ़ा दिया है.
मॉडर्न स्पेसेज़ रियल्टी के सीईओ एरिक बेनैम ने अपने यहां फ़ुट ट्रैफिक में 400 फ़ीसदी का इजाफ़ा नोट किया है.
हालांकि इस बारे में लोगों के अनुमान अलग हैं कि यह कदम न्यूयॉर्क सिटी को कैसे प्रभावित करेगा.
एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेज़ॉन के आने से न्यूयॉर्क के लोगों के लिए सालाना किराये में 1.4 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक इसमें 0.1 फ़ीसदी से कम की बढ़ोतरी होगी.
Monday, November 19, 2018
Friday, November 16, 2018
पीयूष मिश्रा ने क्याें छोड़ दी थी राजश्री की 'मैंने प्यार किया'?
दिल्ली के इंडिया गेट स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित साहित्य आजतक के एक अहम सत्र में गीतकार, अभिनेता पीयूष मिश्रा ने शिरकत की. उन्होंने जहां अपने बारे में कई दिलचस्प बातें जाहिर कीं, वहीं अपने चर्चित गीतों से समां बांधा.
कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए यहां रजिस्टर करें...
पीयूष मिश्रा ने बताया कि उन्हें सलमान खान और भाग्यश्री स्टारर सुपरहिट फिल्म मैंने प्यार किया ऑफर हुई थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दी थी. पीयूष ने बताया- मुझे नहीं पता कि मैंने ये फिल्म क्यों नहीं की. फिल्म के डायरेक्टर सूरज बड़जात्या ने मुझे मिलने बुलाया था, लेकिन मैं नहीं गया. फिल्म की लीड एक्ट्रेस फाइनल हो चुकी थी, एक्टर फाइनल होना था. बड़जात्या मुझे लॉन्च करना चाहते थे, उस समय मैं खूबसूरत दिखता था, लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं फिल्म में काम क्यों नहीं किया. मैं बेवकूफ नहीं जो फिल्म छोड़ देता, लोग कहते हैं कि मैंने थिएटर के कारण छोड़ दी, ऐसा नहीं है.
पीयूष ने कहा- " मुझे इस बात का अफसोस नहीं है. नहीं की तो नहीं की. मैंने कभी नहीं सोचा कि यदि फिल्म मैंने की होती तो क्या होगा. कैसा करियर होता." बता दें कि पीयूष को वही भूमिका ऑफर की गई थी, जो सलमान खान ने निभाई. फिल्म काफी पॉपुलर हुई थी. ये सलमान खान की बतौर लीड एक्टर पहली फिल्म थी.
एक सवाल के जवाब में पीयूष मिश्रा ने कहा, "यार पंगा है मेरे साथ. मेरे साथ क्या था? मुझे अब लगने लगा है कि अगर डिसऑर्डर न हो तो आदमी कुछ क्रिएट नहीं कर पाता है. मेरे अंदर एक पागलपन था. जिसकी वजह से लोग मुझे बहुत प्यार करते थे. अब वो अच्छी जुबान शांत हो गई. मुझे लगता है अब मेरे लिए लोगों की पसंद घट गई है. डगमगाए रहो तो लोग प्यार करते हैं."
पंजाब के फिरोजपुर में जैश ए मोहम्मद के 6 से 7 आतंकवादियों के होने का खुलासा हुआ है. माना जा रहा है कि ये आतंकी इसी इलाके में हैं और दिल्ली की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.
पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस के इनपुट के बाद भारत-पाक सीमा पर सख्ती और सतर्क रहने का अलर्ट जारी किया गया है. बुधवार को पंजाब के पठानकोट के माधोपुर से चार संदिग्धों के द्वारा लूटी गई कार को भी इसी आतंकी हमले की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है और पूरे पंजाब में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है.
माना जा रहा है कि ये आतंकी सड़क मार्ग से दिल्ली की तरफ आकर कोई बड़ी वारदात कर सकते हैं और दिल्ली ना पहुंचने की स्थिति में पंजाब में भी कोई बड़ा आतंकी हमला हो सकता है. वहीं, पंजाब पुलिस की तरफ से जारी हुए अलर्ट की जानकारी के बाद दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और दिल्ली पुलिस भी अलर्ट हो गई है.
कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए यहां रजिस्टर करें...
पीयूष मिश्रा ने बताया कि उन्हें सलमान खान और भाग्यश्री स्टारर सुपरहिट फिल्म मैंने प्यार किया ऑफर हुई थी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दी थी. पीयूष ने बताया- मुझे नहीं पता कि मैंने ये फिल्म क्यों नहीं की. फिल्म के डायरेक्टर सूरज बड़जात्या ने मुझे मिलने बुलाया था, लेकिन मैं नहीं गया. फिल्म की लीड एक्ट्रेस फाइनल हो चुकी थी, एक्टर फाइनल होना था. बड़जात्या मुझे लॉन्च करना चाहते थे, उस समय मैं खूबसूरत दिखता था, लेकिन मुझे नहीं पता कि मैं फिल्म में काम क्यों नहीं किया. मैं बेवकूफ नहीं जो फिल्म छोड़ देता, लोग कहते हैं कि मैंने थिएटर के कारण छोड़ दी, ऐसा नहीं है.
पीयूष ने कहा- " मुझे इस बात का अफसोस नहीं है. नहीं की तो नहीं की. मैंने कभी नहीं सोचा कि यदि फिल्म मैंने की होती तो क्या होगा. कैसा करियर होता." बता दें कि पीयूष को वही भूमिका ऑफर की गई थी, जो सलमान खान ने निभाई. फिल्म काफी पॉपुलर हुई थी. ये सलमान खान की बतौर लीड एक्टर पहली फिल्म थी.
एक सवाल के जवाब में पीयूष मिश्रा ने कहा, "यार पंगा है मेरे साथ. मेरे साथ क्या था? मुझे अब लगने लगा है कि अगर डिसऑर्डर न हो तो आदमी कुछ क्रिएट नहीं कर पाता है. मेरे अंदर एक पागलपन था. जिसकी वजह से लोग मुझे बहुत प्यार करते थे. अब वो अच्छी जुबान शांत हो गई. मुझे लगता है अब मेरे लिए लोगों की पसंद घट गई है. डगमगाए रहो तो लोग प्यार करते हैं."
पंजाब के फिरोजपुर में जैश ए मोहम्मद के 6 से 7 आतंकवादियों के होने का खुलासा हुआ है. माना जा रहा है कि ये आतंकी इसी इलाके में हैं और दिल्ली की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं.
पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस के इनपुट के बाद भारत-पाक सीमा पर सख्ती और सतर्क रहने का अलर्ट जारी किया गया है. बुधवार को पंजाब के पठानकोट के माधोपुर से चार संदिग्धों के द्वारा लूटी गई कार को भी इसी आतंकी हमले की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है और पूरे पंजाब में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है.
माना जा रहा है कि ये आतंकी सड़क मार्ग से दिल्ली की तरफ आकर कोई बड़ी वारदात कर सकते हैं और दिल्ली ना पहुंचने की स्थिति में पंजाब में भी कोई बड़ा आतंकी हमला हो सकता है. वहीं, पंजाब पुलिस की तरफ से जारी हुए अलर्ट की जानकारी के बाद दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और दिल्ली पुलिस भी अलर्ट हो गई है.
Tuesday, November 6, 2018
आरबीआई सरकार का सीट बेल्ट, केंद्र की मर्जी पहने या उतार देः राजन
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और केंद्र सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर जारी टकराव के बीच केंद्रीय बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने महत्वपूर्ण सलाह दी है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थिति में आरबीआई की भूमिका राहुल द्रविड़ की तरह धीर-गंभीर फैसले लेने वाले की होनी चाहिए न कि नवजोत सिंह सिद्धू की तरह बयानबाजी करने वाले की।
हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को दिए साक्षात्कार में राजन ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में केंद्रीय बैंक की भूमिका कार की सीट बेल्ट की तरह है, जो दुर्घटना रोकने के लिए जरूरी होता है। राजन ने केंद्रीय बैंक तथा केंद्र सरकार के बीच मतभेदों, सेक्शन सात के इस्तेमाल, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) संकट, प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (पीसीए), केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) का नोटिस तथा आरबीआई के बोर्ड सहित कई मुद्दों पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। आइए जानते हैं, उन्होंने किस मुद्दे पर क्या कहा?
रुपये की अस्थिरता
रुपये का सही स्तर क्या हो, इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता। फोकस रुपये के स्तर पर नहीं, बल्कि उन चीजों पर होना चाहिए, जो इसे उपयुक्त स्तर पर रखने में सहायक हो।
सेक्शन सात
राजन ने कहा कि सेक्शन सात का इस्तेमाल नहीं किया जाना अच्छी खबर है। अगर सेक्शन 7 का इस्तेमाल किया गया, तो दोनों के बीच संबंध बदतर हो जाएंगे, जो चिंता की बात होगी। आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच बातचीत जारी है और दोनों एक दूसरे का सम्मान करते हुए काम करते हैं। इस बात से सहमत हूं कि आरबीआई सरकार की एक एजेंसी है, लेकिन इसे कुछ खास कर्तव्य सौंपा गया है। बातचीत सम्मान के आधार पर होनी चाहिए। उन्हें एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र का ध्यान रखना पडे़गा और जब इसमें दखलअंदाजी होगी तो समस्या होगी। उम्मीद है कि आरबीआई के अधिकार क्षेत्र का सम्मान होगा।
आरबीआई बनाम केंद्र सरकार
पूर्व गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक ड्राइविंग सीट पर बैठी केंद्र सरकार के सीट बेल्ट की तरह है। यह फैसला सरकार को करना है कि वह सीट बेल्ट पहनना चाहती है या नहीं। सीट बेल्ट पहनने से दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से बचाव में सहायता मिलती है। सरकार विकास को बढ़ावा देने के बारे में सोचती है, तो आरबीआई वित्तीय स्थिरता पर फोकस करता है। आरबीआई के पास ना कहने का अधिकार है क्योंकि वह स्थिरता बरकरार रखने के लिए जिम्मेदार है। यह राजनीतिक प्रदर्शन या अपना हित साधने का साधन नहीं है। केंद्र और आरबीआई एक दूसरे के विचारों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन फिर भी एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र का सम्मान करना होगा।
यह भी पढ़ेंः इन 10 मुद्दों पर RBI और सरकार के बीच खिंचीं तलवारें
एनबीएफसी की तरलता पर बहस
वित्तीय संकट की स्थिति में आरबीआई को फैसला लेना होगा कि एनबीएफसी तरलता की समस्या से जूझ रही है या सॉल्वेंसी के मुद्दे से। करदाताओं के पैसे से निजी इकाइयों को बेल आउट करने से समस्याएं खड़ी होंगी। एनबीएफसी की तरलता के मुद्दे को सुलझाने के लिए ओएमओ एक बढ़िया विचार है। बैंकों को एनबीएफसी को बॉन्ड की गारंटी देने के लिए मंजूरी देना बढ़िया विचार है। उन इकाइयों के जरिए लोन देना, जो एनबीएफसी को सीधे लोन दे सकते हैं, बढ़िया विचार है। एनबीएफसी के लिए कोई भी हस्तक्षेप परेशानी में फंसी खुद कंपनियों के बीच से आना चाहिए।
रोलओवर के लिए चिंतित कंपनियों को बैलेंस शीट को सुधारने के लिए अब इक्विटी बढ़ाने का समय है। केंद्र सरकार के पास बेल आउट के लिए जाना एनबीएफसी के पास अंतिम विकल्प होना चाहिए।
आरबीआई के लाभांश पर सरकार का अधिकार
राजन ने कहा कि जब से यह मुद्दा विवादित हुआ, इस पर कई बार व्यापक रूप से चर्चा का प्रयास हुआ। बजट नजदीक आने पर लाभांश पर चर्चा करना और मुश्किल हो जाता है। मैं लाभांश को एक क्लीनर व मैकेनिकल प्रोसेस बनाना चाहता था, लेकिन यह नहीं हो पाया। आरबीआई की इक्विटी का वैल्यू केंद्र की संपत्ति है, आरबीआई सरकार की सब्सिड्यरी है। भारत के पास 'बीएए' रेटिंग है और वह केवल इसी रेट पर कर्ज ले सकता है। आरबीआई के इक्विटी की रेटिंग 'एएए' है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई को अलग से पूंजी से भरपूर इकाई बनाए रखने से वैश्विक बाजारों में इसका उसे फायदा मिल सकता है। अकाउंटेंट ने आरबीआई को मुनाफे से अधिक लाभांश नहीं देने की सलाह दी है, क्योंकि डिविडेंड अकाउंटिंग, क्रेडिट वर्थिनेस और आरबीआई द्वारा रुपये की छपाई से लाभांश देना मुश्किल हो जाता है। हाल में रुपये में आए अवमूल्यन की वजह से आरबीआई की इक्विटी की वैल्यू बढ़ी है। सरकार को आरबीआई मुनाफे से अधिक लाभांश नहीं दे सकती है। अगर आरबीआई सरकार को मुनाफे से अधिक लाभांश देती है, तो मुद्रास्फीति के हालात पैदा होंगे। अगर लाभांश के बदले उसी अनुपात में सरकार उसे बॉन्ड की बिक्री करती है, तो इससे मुद्रास्फीति के हालात पैदा नहीं होते।
हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को दिए साक्षात्कार में राजन ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में केंद्रीय बैंक की भूमिका कार की सीट बेल्ट की तरह है, जो दुर्घटना रोकने के लिए जरूरी होता है। राजन ने केंद्रीय बैंक तथा केंद्र सरकार के बीच मतभेदों, सेक्शन सात के इस्तेमाल, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) संकट, प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (पीसीए), केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) का नोटिस तथा आरबीआई के बोर्ड सहित कई मुद्दों पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। आइए जानते हैं, उन्होंने किस मुद्दे पर क्या कहा?
रुपये की अस्थिरता
रुपये का सही स्तर क्या हो, इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता। फोकस रुपये के स्तर पर नहीं, बल्कि उन चीजों पर होना चाहिए, जो इसे उपयुक्त स्तर पर रखने में सहायक हो।
सेक्शन सात
राजन ने कहा कि सेक्शन सात का इस्तेमाल नहीं किया जाना अच्छी खबर है। अगर सेक्शन 7 का इस्तेमाल किया गया, तो दोनों के बीच संबंध बदतर हो जाएंगे, जो चिंता की बात होगी। आरबीआई और केंद्र सरकार के बीच बातचीत जारी है और दोनों एक दूसरे का सम्मान करते हुए काम करते हैं। इस बात से सहमत हूं कि आरबीआई सरकार की एक एजेंसी है, लेकिन इसे कुछ खास कर्तव्य सौंपा गया है। बातचीत सम्मान के आधार पर होनी चाहिए। उन्हें एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र का ध्यान रखना पडे़गा और जब इसमें दखलअंदाजी होगी तो समस्या होगी। उम्मीद है कि आरबीआई के अधिकार क्षेत्र का सम्मान होगा।
आरबीआई बनाम केंद्र सरकार
पूर्व गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक ड्राइविंग सीट पर बैठी केंद्र सरकार के सीट बेल्ट की तरह है। यह फैसला सरकार को करना है कि वह सीट बेल्ट पहनना चाहती है या नहीं। सीट बेल्ट पहनने से दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं से बचाव में सहायता मिलती है। सरकार विकास को बढ़ावा देने के बारे में सोचती है, तो आरबीआई वित्तीय स्थिरता पर फोकस करता है। आरबीआई के पास ना कहने का अधिकार है क्योंकि वह स्थिरता बरकरार रखने के लिए जिम्मेदार है। यह राजनीतिक प्रदर्शन या अपना हित साधने का साधन नहीं है। केंद्र और आरबीआई एक दूसरे के विचारों से असहमत हो सकते हैं, लेकिन फिर भी एक दूसरे के अधिकार क्षेत्र का सम्मान करना होगा।
यह भी पढ़ेंः इन 10 मुद्दों पर RBI और सरकार के बीच खिंचीं तलवारें
एनबीएफसी की तरलता पर बहस
वित्तीय संकट की स्थिति में आरबीआई को फैसला लेना होगा कि एनबीएफसी तरलता की समस्या से जूझ रही है या सॉल्वेंसी के मुद्दे से। करदाताओं के पैसे से निजी इकाइयों को बेल आउट करने से समस्याएं खड़ी होंगी। एनबीएफसी की तरलता के मुद्दे को सुलझाने के लिए ओएमओ एक बढ़िया विचार है। बैंकों को एनबीएफसी को बॉन्ड की गारंटी देने के लिए मंजूरी देना बढ़िया विचार है। उन इकाइयों के जरिए लोन देना, जो एनबीएफसी को सीधे लोन दे सकते हैं, बढ़िया विचार है। एनबीएफसी के लिए कोई भी हस्तक्षेप परेशानी में फंसी खुद कंपनियों के बीच से आना चाहिए।
रोलओवर के लिए चिंतित कंपनियों को बैलेंस शीट को सुधारने के लिए अब इक्विटी बढ़ाने का समय है। केंद्र सरकार के पास बेल आउट के लिए जाना एनबीएफसी के पास अंतिम विकल्प होना चाहिए।
आरबीआई के लाभांश पर सरकार का अधिकार
राजन ने कहा कि जब से यह मुद्दा विवादित हुआ, इस पर कई बार व्यापक रूप से चर्चा का प्रयास हुआ। बजट नजदीक आने पर लाभांश पर चर्चा करना और मुश्किल हो जाता है। मैं लाभांश को एक क्लीनर व मैकेनिकल प्रोसेस बनाना चाहता था, लेकिन यह नहीं हो पाया। आरबीआई की इक्विटी का वैल्यू केंद्र की संपत्ति है, आरबीआई सरकार की सब्सिड्यरी है। भारत के पास 'बीएए' रेटिंग है और वह केवल इसी रेट पर कर्ज ले सकता है। आरबीआई के इक्विटी की रेटिंग 'एएए' है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई को अलग से पूंजी से भरपूर इकाई बनाए रखने से वैश्विक बाजारों में इसका उसे फायदा मिल सकता है। अकाउंटेंट ने आरबीआई को मुनाफे से अधिक लाभांश नहीं देने की सलाह दी है, क्योंकि डिविडेंड अकाउंटिंग, क्रेडिट वर्थिनेस और आरबीआई द्वारा रुपये की छपाई से लाभांश देना मुश्किल हो जाता है। हाल में रुपये में आए अवमूल्यन की वजह से आरबीआई की इक्विटी की वैल्यू बढ़ी है। सरकार को आरबीआई मुनाफे से अधिक लाभांश नहीं दे सकती है। अगर आरबीआई सरकार को मुनाफे से अधिक लाभांश देती है, तो मुद्रास्फीति के हालात पैदा होंगे। अगर लाभांश के बदले उसी अनुपात में सरकार उसे बॉन्ड की बिक्री करती है, तो इससे मुद्रास्फीति के हालात पैदा नहीं होते।
Thursday, November 1, 2018
सरकार बताए भगत सिंह शहीद हैं या नहीं'
केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने गृह मंत्रालय से कहा है कि भगत सिंह को शहीद का दर्जा देने के बारे में स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए.
सीआईसी ने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जा सकता तो सरकार इसका विस्तृत स्पष्टीकरण भी दे.
दरअसल, एक आरटीआई में भगत सिंह को शहीद का दर्जा देने के बारे में जानकारी मांगी गई थी. आवेदक ने पूछा कि क्या भगत सिंह को क्रांतिकारी का दर्जा नहीं दिया जा सकता है या नहीं और इसकी क़ानूनी सीमाएं क्या हैं.
सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने आरटीआई के आधार पर कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों को सरकार कई तरह की सुविधाएं और पेंशन देती है, लेकिन भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों को शहीद का दर्जा ही नहीं मिला है.
उन्होंने बताया कि आवेदक ने सबसे पहले राष्ट्रपति भवन को आरटीआई भेजी थी. राष्ट्रपति भवन ने गृह मंत्रालय को जानकारी देने के लिए कहा. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आवेदक ने केंद्रीय सूचना आयोग का रुख किया.
श्रीधर आचार्युलु ने कहा, "भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को शहीद घोषित करने की मांग हर साल उनकी सालगिरह और बरसी पर उठती है. पंजाब सरकार ने सरबजीत सिंह को राष्ट्रीय शहीद घोषित किया है, जिनकी कोट लखपत जेल में मौत हो गई थी. लेकिन भगत सिंह और बाक़ी क्रांतिकारियों की अनदेखी की गई."
दिल्ली में भारी प्रदूषण के बीच 40 लाख पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण की शिकायतें दर्ज कराने के लिए उसने ट्विटर और फेसबुक पर अकाउंट खोले हैं. वहीं सड़कों पर वाहनों की धरपकड़ के लिए टीमें बनाई गई हैं.
दिल्ली सरकार के वकील ने न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाले पीठ को बताया कि दिल्ली में 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल के 40 लाख पुराने वाहनों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है.
पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि कम से कम 15 दिनों तक प्रदूषण की मार झेलने के लिए तैयार रहना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह उस याचिका पर विचार करेगा जिसमें कहा गया है कि आपराधिक मामले में दोषी करार दिए जाने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर ताउम्र बैन लगाया जाना चाहिए.
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी मांग से न भटकें.
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की अर्जी में कहा गया है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा-8 (3) के मुताबिक अगर किसी को दो साल से ज्यादा सजा होती है तो वह सजा काटने के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता. याचिका में कहा गया है कि जैसे ही नेता को आपराधिक मामले में दोषी करार दिया जाता है उसे उम्रभर के लिए चुनाव लड़ने पर बैन किया जाना चाहिए.
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार शरणार्थी शिविरों के नियमों में बदलाव करने की योजना को अंतिम रूप दे रही है. ट्रंप ने ये बात ऐसे वक्त में कही है जब कुछ दिन बाद ही अमरीका में मध्यावधि चुनाव होने हैं.
व्हाइट हाउस में एक भाषण के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अवैध प्रवासी शरणार्थी शिविरों का गलत फायदा उठाते हैं. उन्होंने कहा कि मेक्सिको से लगने वाली सीमा पर दीवार बनने के बाद प्रवासियों को वैध बंदरगाहों से ही आने की अनुमति मिलेगी.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "प्रवासियों को वैध तरीके से ही शरणार्थी शिविरों में आने की अनुमति मिलेगी. जो हमारा कानून तोड़ेंगे और गैर कानूनी तरीके से घुसने की कोशिश करेंगे, उन्हें देश में घुसने नहीं दिया जाएगा. ज़रूरत पड़ने पर हम उन्हें लंबे समय तक रोक कर रखेंगे. जब इस लोगों को घुसने नहीं दिया जाएगा, तो वो धीरे-धीरे खुद ही यहां आना बंद कर देंगे."
सीआईसी ने यह भी कहा कि अगर ऐसा नहीं किया जा सकता तो सरकार इसका विस्तृत स्पष्टीकरण भी दे.
दरअसल, एक आरटीआई में भगत सिंह को शहीद का दर्जा देने के बारे में जानकारी मांगी गई थी. आवेदक ने पूछा कि क्या भगत सिंह को क्रांतिकारी का दर्जा नहीं दिया जा सकता है या नहीं और इसकी क़ानूनी सीमाएं क्या हैं.
सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु ने आरटीआई के आधार पर कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों को सरकार कई तरह की सुविधाएं और पेंशन देती है, लेकिन भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों को शहीद का दर्जा ही नहीं मिला है.
उन्होंने बताया कि आवेदक ने सबसे पहले राष्ट्रपति भवन को आरटीआई भेजी थी. राष्ट्रपति भवन ने गृह मंत्रालय को जानकारी देने के लिए कहा. संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर आवेदक ने केंद्रीय सूचना आयोग का रुख किया.
श्रीधर आचार्युलु ने कहा, "भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को शहीद घोषित करने की मांग हर साल उनकी सालगिरह और बरसी पर उठती है. पंजाब सरकार ने सरबजीत सिंह को राष्ट्रीय शहीद घोषित किया है, जिनकी कोट लखपत जेल में मौत हो गई थी. लेकिन भगत सिंह और बाक़ी क्रांतिकारियों की अनदेखी की गई."
दिल्ली में भारी प्रदूषण के बीच 40 लाख पुराने वाहनों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण की शिकायतें दर्ज कराने के लिए उसने ट्विटर और फेसबुक पर अकाउंट खोले हैं. वहीं सड़कों पर वाहनों की धरपकड़ के लिए टीमें बनाई गई हैं.
दिल्ली सरकार के वकील ने न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाले पीठ को बताया कि दिल्ली में 15 साल से पुराने पेट्रोल और 10 साल से पुराने डीजल के 40 लाख पुराने वाहनों का पंजीकरण निरस्त कर दिया गया है.
पर्यावरण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा है कि कम से कम 15 दिनों तक प्रदूषण की मार झेलने के लिए तैयार रहना होगा.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह उस याचिका पर विचार करेगा जिसमें कहा गया है कि आपराधिक मामले में दोषी करार दिए जाने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने पर ताउम्र बैन लगाया जाना चाहिए.
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह अपनी मांग से न भटकें.
याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की अर्जी में कहा गया है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा-8 (3) के मुताबिक अगर किसी को दो साल से ज्यादा सजा होती है तो वह सजा काटने के बाद छह साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता. याचिका में कहा गया है कि जैसे ही नेता को आपराधिक मामले में दोषी करार दिया जाता है उसे उम्रभर के लिए चुनाव लड़ने पर बैन किया जाना चाहिए.
अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी सरकार शरणार्थी शिविरों के नियमों में बदलाव करने की योजना को अंतिम रूप दे रही है. ट्रंप ने ये बात ऐसे वक्त में कही है जब कुछ दिन बाद ही अमरीका में मध्यावधि चुनाव होने हैं.
व्हाइट हाउस में एक भाषण के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अवैध प्रवासी शरणार्थी शिविरों का गलत फायदा उठाते हैं. उन्होंने कहा कि मेक्सिको से लगने वाली सीमा पर दीवार बनने के बाद प्रवासियों को वैध बंदरगाहों से ही आने की अनुमति मिलेगी.
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, "प्रवासियों को वैध तरीके से ही शरणार्थी शिविरों में आने की अनुमति मिलेगी. जो हमारा कानून तोड़ेंगे और गैर कानूनी तरीके से घुसने की कोशिश करेंगे, उन्हें देश में घुसने नहीं दिया जाएगा. ज़रूरत पड़ने पर हम उन्हें लंबे समय तक रोक कर रखेंगे. जब इस लोगों को घुसने नहीं दिया जाएगा, तो वो धीरे-धीरे खुद ही यहां आना बंद कर देंगे."
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